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फिटनेस व रूट परमिट बिना नहीं दौड़ेंगी बसें, जांच में फंसे अफसरों को नोटिस

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गोंडा में रोडवेज बस स्टेशन के पास खड़ी बसें। - फोटो : GONDA
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गोंडा। बाराबंकी हादसे से सबक लेते हुए संभागीय परिवहन विभाग ने फिटनेस व रूट परमिट के बिना चल रहे यात्री वाहनों पर लगाम कसनी शुरू कर दी है। बाराबंकी हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद हादसे का शिकार हुई बस का फिटनसे व रूट परमिट न मिलने पर मंडल के कई अफसर जांच के दायरे में आ गए हैं।
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आरटीओ प्रवर्तन ने बहराइच के एआरटीओ समेत तीन अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी की है। जिसमें बिना फिटनेस व रूट परमिट के बस संचालन पर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस का जवाब मिलने पर जांच में फंसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
बाराबंकी में बस व ट्रक भिड़ंत में 15 लोगों की मौत से संभागीय परिवहन विभाग ने सबक लेते हुए बिना फिटनेस व परमिट के बसों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए चेकिंग अभियान तेज करने का निर्णय लिया है।
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एसआरटीओ प्रशासन एवम् प्रवर्तन की देखरेख में चेकिंग अभियान चलाकर ऐसी बसों व अन्य यात्री वाहनों के खिलाफ कार्यवाई की तैयारी की गई है।
बाराबंकी सड़क हादसे में बहराइच की बिना फिटनेस व रूट परमिट के बस का संचालन पाए जाने पर हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन ने बहराइच के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी राजीव कुमार, यात्रीकर अधिकारी महेश वर्मा व संभागीय निरीक्षक प्राविधिक ओपी सिंह को नोटिस जारी की है। संभागीय परिवहन अधिकार प्रवर्तन ने तीनों अधिकारियों से जवाब तलब किया है। नोटिस का जवाब मिलते ही तीनों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
संभागीय परिवहन विभाग में जनपद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के दो पद हैं। एक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन व दूसरा सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन। मगर यहां मौजूदा समय में सिर्फ एक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी बबिता वर्मा की तैनाती है।
इन पर दोनों पदों को निभाने की जिम्मेदारी दी गई है। शासन का आदेश है कि सभी अफसर अपने कार्यालय में सुबह नौ बजे से बारह बजे तक समस्याओं का निराकरण करेंगे। ऐसे में एकऌ ही अधिकारी के पास दो पदों की जिम्मेदारी होने से चेकिंग के साथ ही राजस्व का लक्ष्य भी पूरा करना मुश्किल हो गया है।
गोंडा जनपद के तीन ट्रांसपोर्टर ऐसे ही हैं, जिनकी दो दर्जन से अधिक बसें यहां से सवारियां लेकर दिल्ली व पंजाब प्रांत के लुधियाना जनपद तक जाती हैं। हालांकि इन बसों में से अधिकांश के मालिकों ने रूट परमिट ले रखा है।
मगर इनकी बसों के भी फिटनेस समाप्त हो चुके हैं। सरकार की माह सितम्बर तक की फिटनेस में छूट की गाइड लाइन ने भी बस मालिकों को फिटनेस कराने के झंझावत से दूर कर दिया है। मगर सवाल है कि अगर हादसे में लोगों की जान जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
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