गोंडा। किसानों के जी का जंजाल बन चुके छुट्टा पशुओं से छुटकारे की पहल अब ग्राम्य विकास विभाग कर रहा है। मनरेगा के नये बजट में पशु-शेड के निर्माण की योजना रखी है। इसमें किसानों को जोड़ा जाएगा और उन्हें मनरेगा से पशु-शेड बनवाकर दिया जाएगा। यही नहीं, किसानों को मजदूरी भी मिल सकेगी।
इसके साथ ही पशुओं को रखने पर प्रति पशु 30 रुपये महीने मदद भी मिलेगी। गोआश्रय केंद्रों के साथ ही यह व्यक्तिगत योजना शुरू की गई है। पंचायतें सर्वे करके जरूरत के हिसाब से पशु-शेड का निर्माण कराने का प्रस्ताव करेंगी। स्वीकृति के बाद पशु-शेड का निर्माण हो सकेगा।
छुट्टा जानवरों से खेतीबाड़ी को काफी नुकसान हो रहा है। किसान इससे काफी परेशान हैं। छुट्टा पशुओं से निजात के लिए अभी तक गोआश्रय केंद्रों के साथ पशु-शेड का निर्माण भी कराया गया था। जिले में करीब 50 गोआश्रय केंद्र और 500 के करीब पशु-शेड का निर्माण हो रहा है। करीब 700 किसानों ने पशुओं को संरक्षित कर रखा है। इन्हें प्रति पशु प्रतिदिन 30 रुपये की सहायता पशुपालन विभाग से मिलती है।
इसके अलावा गोआश्रय केंद्रों और किसानों के पास करीब नौ हजार छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने का दावा पशु पालन विभाग कर रहा है। इसके बाद भी छुट्टा पशुओं से किसानों को नुकसान हो रहा है। अब नये वित्तीय वर्ष में मनरेेगा से पशु-शेड बनाने की तैयारी है ताकि पशुओं को गांवों में ही संरक्षित किया जा सके। छुट्टा पशु सड़कों पर न घूमें, इसकी पहल की जा रही है। जिले में 1214 पंचायतों में पशुपालन करने वाले उन किसानों को पशु-शेड की सौगात मिल सकेगी जो मनरेगा गाइड लाइन के दायरे में आते हैं।
किसानों की खेती को छुट्टा पशुओं से सुरक्षित करने में पशुपालकों से भी मदद ली जाएगी। इसके लिए उन्हें जागरूक करने के साथ ही योजना से जोड़ा जाएगा। माना जा रहा है कि मनरेगा में श्रम और सामग्री के अनुपात को ध्यान में रखकर ही पशु शेड की योजना शुरू होगी जिससे मनरेगा एक्ट प्रभावित न होने पाए।
मनरेगा से किसानों के लिए कई योजनाओं का संचालन होना है। इसके लिए पंचायतों को निर्देश दिए गये हैं। छुट्टा पशुओं के लिए योजनाएं संचालित की जाएंगी।
-शशांक त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी