फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेकार मिली लाखों की मशीनें, ओपीडी में डॉक्टर नदारद

विज्ञापन
विज्ञापन
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक तथा संयुक्त निदेशक ने बुधवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान फिजियोथेरेपी के लिए खरीदी गयी लाखों की मशीनें कबाड़ में बेकार पड़ी मिली। ओपोडी कक्षों में भी डाक्टर नदारद और मरीज उनका इंतजार करते मिले। इस दौरान एक डाक्टर की ओपीडी टेबल पर एक निजी पैथालॉजी का विजिटिंग कार्ड व पंपलेट मिलने पर संयुक्त निदेशक ने सख्त नाराजगी जताई।
विज्ञापन

मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखने के लिए बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल व संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल मिश्र जिला अस्पताल पहुंचे। एडी व जेडी को देखकर जिला अस्पताल के मैट्रन दिनेश मिश्र आनन-फानन में व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने में जुट गए। इस पर दोनों ही अफसरों को फटकार लगानी पड़ी।
दोनों अधिकारियों ने सबसे पहले ओपीडी का निरीक्षण किया। इसमेें कई डॉक्टर कक्षों से नदारद मिले। डॉ. वीके गुप्ता के ओपीडी में उनका तथा एक निजी पैथालॉजी का विजिटिंग कार्ड रखा मिला। विजिटिंग कार्ड पर उनका निजी पता, मिलने का समय व अन्य विवरण लिखा देख कर जेडी ने सख्त नाराजगी जतायी। उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पताल की आड़ में प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टरों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाए। निरीक्षण के दौरान फिजीशियन डॉ. मो. जमा, डॉ. एजाज अहमद व आर्थो सर्जन डॉ. पीएन सिंह भी ओपीडी में मौजूद नहीं मिले।
विज्ञापन

इस दौरान मौजूद वार्ड ब्वाय ने आर्थो सर्जन के बचाव में स्पष्टीकरण देने की कोशिश की। इस पर नाराजगी जताते हुए जेडी ने उक्त वार्ड ब्वाय को आर्थो वार्ड ड्यूटी से हटाए जाने का निर्देश भी दिया।
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम के पास ओपीडी रजिस्टर नहीं मिला, वो रफ रजिस्टर में मरीजों का नाम नोट कर रहे थे जबकि डॉ. हरिओम वर्मा को रजिस्टर में दवा व इलाज का विवरण न लिखने पर फटकार लगाई गयी। निरीक्षण के दौरान पूरे समय मौजूद रहे मैट्रन दिनेश मिश्र डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष से गायब मिलने पर उनके राउंड पर होने की बात कह कर दोनों अधिकारियों को भ्रमित करते दिखे।
निरीक्षण के दौरान एडी व जेडी आर्थो वार्ड के अंदर पहुंचे जहां एक कमरे में फिजियोथेरेपी के लिए खरीदी गई लाखों रुपये की मशीनें कबाड़ में बेकार पड़ी मिलीं। बताया गया कि करीब छह साल पहले दस लाख की लागत से इन मशीनों को खरीदा गया था लेकिन प्रयोग के लिए अभी तक इंस्टाल तक नहीं किया गया। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला ने कहा कि ये मशीने डॉ. अरुण लाल के कार्यकाल में खरीदी गई थी। एडी ने जिला अस्पताल में मिली खामियों पर प्रमुख अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब करते हुुए मैट्रन व अन्य कर्मचारियों का अनुशासन में रहने की ताकीद दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें