उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल मेें करीब पैंसठ हजार फार्मासिस्ट पंजीकृत हैं जिनमें पंद्रह हजार सरकारी नौकरी कर रहे हैं और पांच हजार फार्मासिस्टों की मृत्यु हो चुकी है। ड्रग्स निरीक्षक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से मिलीभगत कर प्रदेश में 80 हजार मेडिकल स्टोर संचालित हैं। ये बातें सोमवार को गांधीपार्क में फार्मासिस्ट फाउंडेशन के पदाधिकारियों की बैठक करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित ने कही।
फार्मासिस्ट फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित ने बताया कि गोंडा में अधिकतर मेडिकल स्टोर सरकारी फार्मासिस्ट के नाम पर संचालित हैं और औषधि नियंत्रक व निरीक्षक सुविधा शुल्क लेकर झोला छाप मेडिकल स्टोरों को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन ने उक्त मेडिकल स्टोरों की जांच कराकर कार्यवाही नहीं की तो फार्मासिस्ट फाउंडेशन आरपार की लड़ाई लड़ेगा।
देवीपाटन मंडल के संगठन प्रभारी डॉ. कुलदीप मणि त्रिपाठी ने कहा कि फर्जी तरीके से चल रहे मेडिकल स्टोरों पर कोई फार्मासिस्ट नहीं रहता है जिससे मरीजों को लोकल व मानकहीन दवायें बेची जाती हैं।
इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर संचालन का नियम है कि फार्मासिस्ट की उपस्थिति में मरीजों को दवायें दी जायें लेकिन उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा है।
विभिन्न सरकारी योजनाओं में अप्रशिक्षित हाथों से दवायें बंटवाई जा रही हैं जो फार्मासिस्ट एक्ट की अवहेलना है, इसका सरकार को करारा जवाब मिलेगा।
बैठक के समापन पर सर्वसम्मति से डॉ. अरविंद शुक्ल को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष डॉ. प्रशांत मिश्रा, सचिव आनंद पांडेय व कोषाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी डॉ. प्रभाकर पांडेय को मनोनीत किया गया।
बैठक में डॉ. अनुराग शुक्ल, अतुल त्रिपाठी, संजीव, ध्रुव, आनंद वर्मा, विवेक सिंह, शुभम, अभय तिवारी, राकेश दुबे व जयप्रकाश आदि फार्मासिस्ट मौजूद रहे।