गोंडा। जिले वासियों के लिए लखनऊ, बनारस व गोरखपुर की यात्रा अब आसान होगी। यात्रा आसान करने के लिए बहुप्रतीक्षित गोंडा रेलवे यार्ड की इंटरलॉकिंग का कार्य मंगलवार से शुरू कर दिया गया। ये काम आठ जून तक चलेगा। इसके लिए करीब 3,500 रेलवे अधिकारी व कर्मचारी लगाए गये हैं। जिसमें करीब 1,000 रेलकर्मी दूसरे जनपदों से आए हैं। वहीं, रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर निरस्त ट्रेनों की सूचना स्टेशन के पूछताछ कार्यालय से लगातार प्रसारित करा रहा है। जगह-जगह निरस्त हुईं ट्रेनों का पोस्टर भी लगा दिया गया है। मंगलवार को गोरखपुर से वाया बलरामपुर होकर ऐशबाग जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन नहीं चलने के कारण यात्रियों को हलकान होना पड़ा।
बता दें कि करीब चार वर्ष पूर्व गोंडा से बहराइच व लूप खंड स्थित गोंडा से बलरामपुर छोटी लाइन को बड़ी लाइन में अमान परिवर्तन कर दिया गया था। रेलवे प्रशासन ने बड़ी लाइन में परिवर्तन तो कर दिया, लेकिन इन लाइनों को मेन लाइन से व गोरखपुर और लखनऊ रेलखंड से नहीं जोड़ा। इसके चलते बलरामपुर व बहराइच होकर आने-जाने वाली ट्रेनें सीधे गोरखपुर एवं लखनऊ के लिए नहीं जा सकती थीं। इन रूटों से आने वाली ट्रेनों के लिए बनाए गये दो नए प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहता था। जहां यात्रियों के बजाय छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता था।
यात्रियों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर पूर्वोत्तर रेलवे ने 1,460 दिन के बाद मंगलवार से गोंडा रेलवे यार्ड में इंटरलॉकिंग का कार्य शुरू कर दिया है। इसमें जुटे अधिकारियों के मुताबिक प्लेटफार्म नंबर तीन व लाइन नंबर चार व पांच पर बनी कैंची (क्रॉस ओवर) लाइन को खत्म करके कार्य की शुरुआत की गई है। रेलवे प्रशासन ने इंटरलॉकिंग का काम कराने के लिए करीब 3,500 अधिकारियों व कर्मचारियों को लगाया है। इसमें करीब एक हजार रेलकर्मी इज्जतनगर व वाराणसी मंडल से आए हुए हैं। रेलवे के आवास जर्जर होने व रेलवे क्वार्टर कम होने के कारण दर्जनों रेलकर्मी ने शहर के विभिन्न होटलों में ठहरे हैं।
इंटरलॉकिंग का कार्य 23 दिन में पूरा करने का दावा किया जा रहा है। ये कार्य पूरा होने से गोंडा, बहराइच व बलरामपुर जनपद के करीब सवा करोड़ लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। दूसरी ओर गोंडा रेलवे यार्ड में प्लेटफार्म की संख्या बढ़ने से यहां के लोगों को भी लाभ मिलेगा। गोरखपुर और लखनऊ से आने वाली ट्रेनें अब आउटर पर नहीं खड़ी होंगी।
गोंडा रेलवे यार्ड की इंटरलॉकिंग का काम शुरू होने से 84 ट्रेनों को निरस्त किया गया है। मंगलवार को गोरखपुर से वाया बलरामपुर होकर ऐशबाग जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन निरस्त होने से यात्रियों को परेशान होना पड़ा। इसके अलावा पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से यात्रियों का दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। क्षेत्रीय प्रबंधक मनीष कुमार ने बताया कि इंटरलॉकिंग कार्य के कारण ट्रेनों को निरस्त किया गया है। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन के पूछताछ कार्यालय से हर मिनट पर रद्द व बदले रूट की ट्रेनों के बारे में सूचना का प्रसारण कराया जा रहा है। साथ ही स्टेशन परिसर की दीवारों पर निरस्त ट्रेनों की सूचना का पोस्टर भी चस्पा कराए गये हैं।
बताया जा रहा है कि अभी सिर्फ गोंडा व बहराइच के रूट की ट्रेनें बंद हुईं हैं। संभावना जताई जा रही है कि माह की एक या चार जून से बहराइच से मिहींपुरवा व बहराइच से रुपईडीहा रूट की ट्रेनों का संचालन भी बंद हो सकता है। हालांकि, अभी इसकी किसी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है।