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कर्मचारियों ने ही खेल कर बेच दी नजूल की जमीन

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फोटो-2-गोंडा में स्थित गांधीपार्क। -संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। नजूल के खेल में नगर पालिका परिषद से जुड़े कर्मचारियों की हाथ की सफाई साफ दिखायी पड़ने लगी है। प्रशासन की मुहिम को कंधा बनाकर दांव खेल रहे पालिका परिषद की भूमिका पर ही सवाल उठने लगे हैं। सिविल लाइन इलाके में ही नजूल की कई जमीनें ऐसी चिह्नित हैं जिन पर सिर्फ बाउंड्री बनाकर अथवा नींव खोदकर कब्जा किया गया है। नगर पालिका परिषद के कर्मचारी सब कुछ जानते समझने के बाद भी अवैध कब्जे में फंसी नजूल की ऐसी जमीनों पर कार्रवाई को लेकर उदासीन बने हैं।
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शहर में नजूल की भूमि को लेकर दोहरे मापदंड का खेल चल रहा है। इसके चलते ही बीते साल जिस भूमि को सरकारी भूमि कार्यालय के लिए आरक्षित करने के लिए डीएम स्तर से पत्र जारी हुआ, बाद में उसी भूमि का बैनामा कर दिया गया। इसकी जांच फाइलों में ही बंद पड़ी है। शहर में गो आश्रय केंद्र के लिए भी भूमि का निर्धारण नहीं हो पा रहा है। कुछ साल पहले शहर के प्रतिष्ठित गांधी पार्क की भूमि को ही बेच देने का मामला भी खासा चर्चित हुआ था। इसमें नजूल अधीक्षक की गिरफ्तारी तक हुई थी। उस दौरान भी नजूल की जमीन को लेकर नगर पालिका परिषद के कर्मियों की भूमिका पर कई सवाल खड़े हुए थे। इसके बाद भी चंद एक पर कार्रवाई कर पूरे मामले को रफा दफा कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रशासन को अतिक्रमण के साथ ही नजूल जमीन पर अवैध कब्जे की रिपोर्ट देकर पालिका परिषद कर्मियों ने नया खेल शुरू किया है।
मियाद खत्म होने के बाद भी होते रहे नजूल के बैनामे
वर्षों पहले नगर पालिका परिषद से नजूल भूमि का पट्टा लोगों को मिला था। इसकी मियाद पूरी हो जाने के बाद भी परिषद के कर्मचारी इसे लेकर उदासीन बने रहे। पट्टे की मियाद पूरे होने के बाद भी पालिका परिषद ने खाली पड़ी जमीनों पर कब्जा लेने या फिर सरकारी कार्यालयों के लिए आवंटन करने की कोई कार्रवाई नहीं की। इससे मियाद के बाद भी बैनामे हुए और अब वहां भी पक्का निर्माण कार्य हो गया है। विकास भवन के ठीक सामने बिना फ्री होल्ड के ही एक पूरा मोहल्ला ही बस गया है। इसके बाद भी पालिका परिषद के अधिकारी व कर्मचारी आंखें मूंदे रहे। इसी तरह सिविल लाइन इलाके में भी कई स्थान ऐसे हैं, जहां नजूल की जमीनों पर लोगों का अवैध कब्जा अभी तक कायम है।
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अतिक्रमण में खोज रहे नजूल का खेल
नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अतिक्रमण में नजूल का खेल कर अपनी खामियों को छिपाने में लगे हैं। इसके चलते ही प्रशासन की ढाल बनाकर अतिक्रमण के बजाए नजूल का खेल कर लोगों को परेशान किया जा रहा है। सड़क से 55 फिट छोड़कर स्वीकृत नक्शे पर हुए भवन निर्माण को भी नजूल भूमि का बता कर ढहाने की चेतावनी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
अतिक्रमण अभियान में हर तरह के कब्जों की नापजोख की गई है। जहां अतिक्रमण मिला वहा के लोगों से खुद से ही हटाने के लिए कहा गया है, लोग हटा भी रहे हैं। नगरपालिका के कर्मियों की यदि भूमिका है तो उसकी भी जांच कर कार्रवाई तय होगी। संजय मिश्र, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद गोंडा
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