गोंडा। जूनियर हाईस्कूल परिसर में संचालित बेसिक शिक्षा परिषद के 529 प्राथमिक विद्यालयों को एक ही परिसर में स्थिति होने के कारण कंपोजिट स्कूल घोषित किया गया है। इसके साथ ही शासन ने बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों के बजट में भी 53 लाख रुपया की कटौती की है। इसके तहत खेल व लाइब्रेरी के लिए दी जाने वाले बजट राशि में होने वाली कटौती से प्रधानाध्यापकों को झटका लगेगा। नयी व्यवस्था बाद अब केवल जूनियर हाईस्कूलों के लिए तय बजट ही कंपोजिट स्कूलों को दिया जाता है। इससे प्रत्येक स्कूल को दस दस हजार रुपया कम मिल रहे हैं।
जिले में कंपोजिट से पहले 3140 प्राथमिक स्कूल थे। इसमें से 529 प्राथमिक स्कूलों को जोड़कर कंपोजिट स्कूल बना दिया गया है। इससे अब प्राथमिक स्कूलों की संख्या 2611 ही रह गई है। इससे प्रधानाध्यापक के पद तो कम हुए ही हैं, इसके साथ ही बजट में भी कटौती हुई है। कंपोजिट ग्रांट छात्र संख्या के आधार पर ही मिलती है। ऐसे में जिन कार्यों के लिए बजट स्कूलवार दिए जाते हैं, उसमें बड़े स्तर पर कमी हो गई है। पहले प्रत्येक प्राइमरी स्कूलों को पांच- पांच हजार रुपये खेल सामग्री व पांच- पांच हजार रुपये ही लाइब्रेरी के लिए दिए जाते थे तथा जूनियर हाईस्कूलों को दस- दस हजार रुपये दिए जाते हैं। जब प्राइमरी स्कूलों को जोड़कर कंपोजिट स्कूल बनाया गया तो कंपोजिट स्कूलों में प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल दोनों एक साथ हो गए। ऐसे में अब कंपोजिट स्कूलों में प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के बच्चों को एक ही बजट से प्रधानाध्यापकों को मैनेज करना पड़ रहा है। (संवाद)
पद भी घटे, विवाद भी बढ़े
एक ही परिसर के स्कूलों को एक साथ करके कंपोजिट तो बनाया गया, लेकिन इससे कई कार्य प्रभावित हुए। जूनियर हाईस्कूल के ही प्रधानाध्यापकों के जिम्मे दोनों स्कूलों की जिम्मेदारी सौंप दी गयी। इसके लिए अलग से कोई कैडर तय नहीं किया गया। इससे प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के पद घट गए, लंबे समय के बाद प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापकों को सहायक अध्यापक जूनियर हाईस्कूल का नाम देकर कंपोजिट स्कूल में समाहित कर दिया गया। इससे पदोन्नति के अवसर में कमी आई है।
शासन से स्कूलों के लिए बजट तय है और उसका आवंटन होता है। जो भी बजट आता है, उसे प्रबंध समितियों के खाते में भेज दिया जाता है। कोई समस्या है तो उसका निराकरण कराया जा रहा है।
- डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए