गोंडा। कोरोना संकट के कारण करीब डेढ़ सालों से परिषदीय स्कूलों की शिक्षा बेपटरी चल रही थी। पहली सितंबर से पूरी तरह स्कूलों को खोला गया और पढ़ाई भी रफ्तार पकड़ रही थी।
इसी बीच स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली योजनाओं के लिए उनके खातों में बजट भेजे जाने के लिए फरमान जारी हो गया। प्रेरणा एप पर डीबीटी एप पर हर बच्चे की पूरी डिटेल फीड करना चुनौती बन गई। पूरे जिले के शिक्षकों को फीडिंग में लगा दिया गया है, स्थिति यह है कि इससे पढ़ाई भी बाधित हो गई है।
जिले के 3100 स्कूलों में पढ़ने वाले करीब पौने चार लाख बच्चों की डिटेल फीड किए जाने का फरमान जारी करके शिक्षा व्यवस्था से ही खेल हो रहा है। शिक्षकों को हर एक बच्चे के बारे में फीडिंग का काम सौंपा गया, ऐसा तब किया गया जब बीते दिनों एमडीएम की कर्नवजन कास्ट के लिए शिक्षकों से अभिभावकों के बैंक खातों की फीडिंग कराई जा चुकी है।
शिक्षकों का कहना है कि पहले से सब डाटा फीड होने के बाद भी नए सिरे से सबकी फीडिंग कराने का मतलब सिर्फ परेशान करने से है। यही नही हर जानकारी आनलाइन होने के बाद भी बार- बार फीडिंग कराने से अब दिक्कत हो रही है।
इसके अलावा अनुदेशकों और शिक्षामित्रों को न्यूनतम मानदेय मिल रहा है, ऐसे में वह एंड्रायड मोबाइल कहां से लें और नेटपैक डालकर काम करें। विभाग की ओर से समय से मानदेय भी नही दिया जा रहा है। इस तरह बेसिक शिक्षा में इस समय डीबीटी की फीडिंग को लेकर बवाल चल रहा है।
डीबीटी से शिक्षक संगठनों में आक्रोश है, पदाधिकारियों ने विभिन्न मांगों में डीबीटी को प्रमुखता से रखा और ज्ञापन सौंपा है। इसमें पुरानी पेंशन की बहाली समेत विभिन्न मांगों को पूरा न किये जाने से नाराज शिक्षकों ने आंदोलन का रुख किया है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनय तिवारी व जिला मंत्री उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ो पदाधिकारियों व शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
डीबीटी योजना लागू करके विभाग एक छात्र के अभिभावक के खाते में 1056 रुपये देने की योजना बनाया है। जिसमें यूनिफार्म के लिए 600 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये, जूता के लिए 135 रुपये, मोजा के लिए 21 रुपये और स्कूल बैग के लिए 100 रुपये मिलेंगे।
पहले इन सामग्री का वितरण ठेके की व्यवस्था से क्रय करके किया जाता था। बताया जा रहा है कि इतने कम रूपये में ठेकेदार एकमुश्त खरीद करने और गुणवत्ता की अनदेखी करके सामग्री दे भी देता था। लेकिन अब इतने कम रुपये में अभिभावकों को अलग- अलग सामान लेना होगा तो उन्हें बाजार मूल्य पर ही सामग्री मिलेगी।
बाजार मूल्य के अनुसार यूनिफार्म में एक शर्ट, स्कर्ट या हाफ पैंट का मूल्य 800 से 900 रुपये, स्वेटर कम से कम 300 से 600 रुपये, जूता किसी भी कंपनी का 500 रुपये से कम में मिलना संभव नही है, मोजा की कीमत 30 से 50 रुपये और स्कूल बैग भी 300 से 500 रुपये तक ही मिलेंगे। इस तरह अभिभावकों के सामने बच्चों के लिए सामग्री खरीद की दिक्कत आएगी और शायद ही गांव के लोग सामग्री क्रय करें।