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बुरा हालः दवाओं के मामले में अस्पताल कंगाल

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फोटो-8-गोंडा के जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। -संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला महिला अस्पताल में छह महीने से ग्लूकोज व करीब एक दर्जन जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत बनी हुई है। इससे प्रसव व इलाज कराने आए मरीजों का दर्द बढ़ जा रहा है। तीमारदारों को बाहर से महंगी ग्लूकोज व दवाई खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से लोकल परचेज के सहारे दवाओं की पूर्ति करने की बात कही जाती है।
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जिला महिला अस्पताल को छह महीने से आरएल व एनएस की बोतलों सहित दर्जनों जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। बताया जा रहा है कि मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन को कई बार डिमांड भेजने के बावजूद हिमेक्सिल एआईवी व मेट्रोजिल जैसी अति महत्वपूर्ण दवाओं की आपूर्ति नहीं की गई है। अति महत्वपूर्ण दवाओं को लोकल परचेज के जरिए खरीदकर मुहैया कराया जाता है, लेकिन अन्य दवाओं के लिए तीमारदारों को जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं।
वार्ड में कार्यरत कर्मियों की माने तो पिछले कुछ महीनों से ग्लूकोज व अन्य दवाइयों की सप्लाई न होने से संकट गहरा गया है। सामान्य बीमारी व खून की कमी को बढ़ाने के लिए दी जाने वाली ग्लूकोज खत्म हो गई है। मरीजों को बाहर करीब छह सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तीमारदारों को रात के समय में होती है। एक-एक मरीज पर कई बोतलें लग जाती हैं। एक अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ने बताया कि पेट दर्द से लेकर अन्य बीमारियों की दवाएं अस्पताल में लगभग खत्म हैं। इटियाथोक से आए एक तीमारदार का कहना है कि मरीज को ग्लूकोज की जरूरत थी जिसे उन्हें बाहर से लाना पड़ा। मनकापुर से आए राम निहोर ने बताया कि अपने मरीज के लिए उन्हें सात सौ रुपये की दवा बाहर से लेनी पड़ी।
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रसायन की कमी से प्रभावित हो रही जांच
पिछले दिनों से महिला अस्पताल में रसायन की कमी के चलते कई जांच प्रभावित हो रही हैं। रसायन न होने से सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) की जांच प्रभावित हो रही है। गर्भवती को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें जांच के लिए बाहर का रास्ता देखना पड़ था है।
कार्पोरेशन के गोदाम में दवाओं व इंजेक्शनों की कोई कमी नहीं है। गोदाम भरा हुआ है, दवाओं को कोई ले जाने वाला ही नहीं है। कुछ दिन पहले ग्लूकोज की दिक्कत थी, लेकिन अब सभी प्रकार की दवाएं हैं। मनीष उपाध्याय, इंचार्ज मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन वेयर हाउस
कार्पोरेशन की ओर से दवाओं व जरूरी मेडिकल उपकरणों की सप्लाई नहीं दी जा रही है। कई जरूरी दवाओं की कमी है। लोकल परचेज के जरिए मरीजों को दवाएं मुहैया कराई जा रही है। कई बार कार्पोरेशन को डिमांड भेजा गया है। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल
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