गोंडा। जिले में 289 मदरसों में फर्जीवाड़े पर शासन से कार्रवाई शुरू हो गई है। शासन ने अनियमितता करने वाले 82 मदरसों को अनुदान सूची से बाहर कर दिया है। पहले 371 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना से शिक्षकों के मानदेय का अनुदान मिल रहा था, अब 289 मदरसे ही रह गए हैं। इनकी भी जांच शुरू हो गई है, कागजों में चलने वाले मदरसों को अनुदान की सूूची से बाहर किया जा रहा है।
सभी मदरसों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। इन 289 मदरसों के तीन-तीन शिक्षकों को केंद्र व राज्य सरकार की ओर से मानदेय का अनुदान मिल रहा था। इनमें से 82 मदरसों का अनुदान रोक दिया गया है।
जिले में मदरसों का संचालन मनमाने ढंग से होने की बात सामने आने पर शासन ने कड़ा कदम उठाया है। 82 मदरसों को अनुदान से बाहर किए जाने से दो सौ से अधिक शिक्षकों का मानदेय रोक दिया गया है। इन मदरसों में शासन से स्नातक पास शिक्षकों को छह-छह हजार रुपये मासिक और परास्नातक पास शिक्षकों को 12-12 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था। इन शिक्षकों का काम था कि वे छात्रों को मदरसे में हो रही पढ़ाई के अलावा विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषय की भी शिक्षा दें।
बताया जा रहा है कि जिन मदरसों को अनुदान से बाहर किया गया है, उनमें से ज्यादातर सही ढंग से संचालित नहीं हो रहे थे। कई मदरसों की सूचना शिक्षा विभाग के यू-डायस पर भी अपडेट नहीं थी। इसके अलावा सत्यापन में उनका संचालन तय मानक के विपरीत मिला। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने बताया कि 82 मदरसों को अभी आधुनिकीकरण योजना से बाहर किया गया है। अभी तक इन मदरसों में पढ़ाने वाले तीन-तीन शिक्षकों को अनुदान मिलता था।
उन्होंने बताया कि अब सभी मदरसों की जांच होगी, इसके लिए मदरसा बोर्ड ने आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिन मदरसों के यू-डायस अपडेट नहीं हैं, उनकी भी सूचना तैयार की जा रही है। बताया कि अब मानक पूरा किए बिना मदरसे का संचालन संभव नहीं हो सकेगा। इसके लिए कड़ाई से कार्रवाई की जा रही है।
जिले के छह अनुदानित मदरसों के हाफिज पद पर तैनात तीन शिक्षक बिना जायज प्रमाणपत्र के ही बरसों से सरकारी खजाने से वेतन व भत्ते हासिल कर रहे हैं। मदरसा बोर्ड ने अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। जिले के छह अनुदानित मदरसों के तहतानिया (प्राइमरी) कक्षा में नियुक्त अध्यापकों के हाफिज के प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था ने किस अधिकार से प्रमाण पत्र जारी किया है, इसका रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है।
इसमें सेवा नियमावली में हिर्ज के प्रमाण पत्र का जिक्र है और उसी आधार पर नियुक्तियां की गईं हैं लेकिन हिर्ज का प्रमाणपत्र किस संस्था का मान्य होगा, इसके लिए कोई निर्देश नहीं मिल रहा है। विभाग फाइलें खंगालने में जुटा है। अब बिना मान्य प्रमाणपत्र के ही हाफिज पद पर तैनात शिक्षक को सरकारी वेतन व भत्ते देने पर विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। अब पूरे मामले की छानबीन हो रही है, इससे तीन शिक्षक भी जांच में फंसे हैं।
मदरसों की जांच की जा रही है। जिन मदरसों में कोई कमी मिलती है, उनका अनुदान रोक दिया जा रहा है। इसके अलावा हाफिज शिक्षकों की नियुक्ति के मामलों की भी छानबीन हो रही है। शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है, शासन स्तर से ही कार्रवाई होनी है।
-पवन सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी