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शिक्षकों की कमी से जूझ रहा जीआईसी

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11-गोंडा में फखरुद्दीन अली अहमद राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों के न होने से कक्षाएं छोड़ बाहर बराम? - फोटो : GONDA
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गोंडा। शहर में राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षा की अलख अब बुझने लगी है। विज्ञान संकाय ही नहीं भाषा के शिक्षक न होने से पढ़ाई का दायरा घट गया है। कभी देश को पांचवां राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद देने वाले कालेज का आंगन अब शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। कॉलेज की साख पर बट्टा लगा है और छात्रों की संख्या भी घट रही है। कॉलेज में प्रधानाचार्य के साथ ही 24 शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित है। हाल यह है कि कभी प्रवेश के लिए लाइन लगने वाले कॉलेज में छात्रों का टोटा हो गया है।
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शहर में सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज होने के तमगे से गुलजार रहने वाले फखरुद्दीन अली अहमद राजकीय इंटर कॉलेज आज बच्चों को पर्याप्त शिक्षा की व्यवस्था देने के लिए सक्षम नहीं दिख रहा है। कॉलेज में न तो भवन की कमी है और न ही व्यवस्थाओं का, बस कमी है तो शिक्षकों की। कला व विज्ञान संकाय दोनों की पढ़ाई कराने वाले इंटर कालेज में विज्ञान के शिक्षकों की कमी से छात्रों का रुझान कम हो रहा है। पहले कालेज में प्रवेश के लिए मेरिट जारी होती थी, अब बच्चों की कमी हो रही है। कक्षा-6 से 12 तक की शिक्षा देने वाले सरकारी कालेज में 500 छात्र ही पंजीकृत हैं और यहां दो हजार के करीब बच्चों को शिक्षा देने की व्यवस्था है। इसका अहम कारण शिक्षकों की कमी है और कालेज में नवीन संसाधनों की व्यवस्था न होना। छात्र संख्या कम होने से कॉलेज को कई योजनाओं के लाभ से हाथ मलना पड़ रहा है।
चाहिए 35 शिक्षक और 11 की है तैनाती
राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के साथ ही 25 एलटी ग्रेड शिक्षकों के साथ ही 10 प्रवक्ताओं के पद हैं। पांच सालों से कॉलेज को स्थाई प्रधानाचार्य ही नहीं मिले हैं। इसके अलावा एलटी ग्रेड के 25 शिक्षकों के स्थान पर 9 और 10 प्रवक्ता के स्थान पर 2 प्रवक्ता ही कार्यरत हैं। एक साथ ही 24 शिक्षकों की कमी से पढ़ाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इससे छात्रों की संख्या में गिरावट आ रही है। वहीं कालेज की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है।
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शासन से शिक्षक न मिलने पर कॉलेज ने की व्यवस्था
शासन स्तर से शिक्षकों की उपलब्धता न कराए जाने पर कालेज के शिक्षक-अभिभावक संघ की ओर से 5 शिक्षकों की तैनाती मानदेय आधार पर की गई है, इसके बाद भी पर्याप्त शिक्षकों नहीं मिल पाए। कालेज के पास सीमित संसाधन है, ऐसे में अधिक शिक्षकों को मानदेय के आधार पर रख भी नहीं सकते हैं। फिलहाल कॉलेज को अभी शासन से शिक्षकों की उपलब्धता का इंतजार है।
शिक्षकों की दूर हो कमी तो फिर से फैले शिक्षा की किरण
राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी का दर्द शिक्षकों के साथ ही छात्रों में भी दिखा। कॉलेज के प्रवक्ता एसके सिंह ने दावा किया कि सीमित संसाधनों में बेहतर व्यवस्था देने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को किसी तरह की समस्या नही होने दी जा रही है। खेल शिक्षक राम नगीना यादव ने कहा कि हर तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। शिक्षकों की कमी दूर हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं होगी। कॉलेज के इंटर के छात्र प्रशांत सिंह कहते हैं कि शिक्षकों की काफी कमी है, फिर भी शिक्षक पूरा प्रयास करते हैं कि बच्चों को पूरी जानकारी दी जाए। अमन शुक्ल भी शिक्षकों के तैनाती की मांग तो करते हैं लेकिन शिक्षा व्यवस्था अच्छी बता रहे हैं। इसी तरह कौशल तिवारी व विजय तिवारी भी कहते है कि शिक्षकों की कमी है तो दिक्कत तो होगी ही। कई सालों से शिक्षकों की कमी है। शिवम व अजीत शुक्ल भी कहते हैं कि कालेज का पूरे जिले में नाम है लेकिन शिक्षकों की कमी से छात्र प्राइवेट कालेजों में नाम लिखा रहे हैं।
कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था सुधारने की पहल पर विराम
राजकीय इंटर कॉलेज की प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने एक पहल बीते 2018 शैक्षिक वर्ष में शुरू हुई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी जेबी सिंह के निर्देशन में सीडीओ आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल व एसडीएम सदर आईएएस अर्चना वर्मा ने एक प्लान तैयार किया था। जिन विषयों के शिक्षक नही थे और जिले में उन विषयों के जानकार शिक्षक उपलब्ध हैं जो उन्हें योगदान देने की रणनीति तैयार हुई थी। सीडीओ व एसडीएम के साथ ही अन्य विभागों के अधिकारियों ने शिक्षक की भूमिका निभाई और कॉलेज में क्लास लिया। माई अफसर माई मेंटर मुहिम से काफी दिनों तक बच्चों को शिक्षा दी गई, लेकिन अधिकारियों के तबादले के साथ ही यह योजना भी गुम हो गई।
शासन को भेजी गई है रिपोर्ट
राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। शिक्षकों का चयन होने पर शासन स्तर से ही तैनाती होनी है। स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा देने के लिए अस्थाई व्यवस्था की गई है। -अनूप कुमार, डीआईओएस
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