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सवा दो करोड़ मंडी शुल्क वसूल कर किया बंदरबांट

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करनैलगंज (गोंडा)। करनैलगंज की नवीन फल, सब्जी व गल्ला मंडी में मंडी शुल्क तो वसूले गए लेकिन उसे मंडी के खाते में न जमा कर उसका बंदरबांट लिया गया। करीब सवा दो करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसका खुलासा ऑडिट के दौरान हुआ है।
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करनैलगंज तहसील मुख्यालय पर स्थित फल, सब्जी व गल्ला मंडी समिति के कर्मचारियों द्वारा बड़े घोटाले किये गए हैं। करनैलगंज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव तथा मंडी कर्मचारियों की मिलीभगत से विभाग को करोड़ों रुपये का झटका पहुंचाया गया है। इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब विभागीय ऑडिट शुरू हुई।
उप निदेशक प्रशासन ज्योति यादव ने मामले को गंभीरता से लिया और मण्डी समिति में तैनात घोटालेबाज अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा विभाग को पहुंचाये गये नुकसान व गबन की राशि की भरपाई के लिए दिसंबर 2021 तक की मोहलत दी है। घोटाले में शामिल कुछ मंडी कर्मियों का नाम भी प्रकाश में आया है।
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मंडी में तैनात रहे हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव व प्रमोद कुमार श्रीवास्तव का कोरोना काल में निधन हो चुका है। बीते वित्तीय वर्ष 2013-14 से वर्ष 2020-21 की विभागीय ऑडिट संप्रेक्षक दल मण्डी परिषद लखनऊ द्वारा विगत 7 सितंबर 2021 से 10 सितंबर 2021 के मध्य हुई थी। इस ऑडिट के बाद विभागीय विशेष संप्रेक्षण आख्या से यह पता चला कि करनैलगंज मण्डी समिति के जिम्मेदारों ने 2 करोड़ 25 लाख 17 हजार 43 रुपये का विभाग को चुना लगाया है।
विभागीय ऑडिट में यह खुलासा हुआ कि मण्डी समिति के कर्मचारियों द्वारा व्यापारियों से बगैर मण्डी शुल्क लिये ही उन्हें गेट पास जारी कर दिया गया। यही नहीं गेट पास जारी करने के लिए व्यापारियों से लिया गया शुल्क भी सरकारी खजाने में नहीं जमा किया गया।
उप निदेशक मंडी प्रशासन द्वारा 27 नवंबर 2021 को नोटिस जारी कर इस घोटाले व गबन की राशि को जमा करने का निर्देश भी जारी किये गए थे तथा मामले में दोषी कर्मचारियों के सभी प्रकार के देयक को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया गया था।
इसमें कहा गया कि दोषी कर्मचारियों द्वारा जब तक विभागीय क्षति की भरपाई नहीं की जाती है तब तक इन सभी के सेवानिवृत्त संबंधी भुगतान व अन्य कोई भुगतान नहीं किया जायेगा। माना जा रहा है कि मंडी समिति की ऑडिट भी आधी अधूरी की गई। समिति के कर्मचारियों द्वारा ऑडिट में सहयोग न किये जाने से ऑडिट का काम भी पूरा नहीं हुआ। करनैलगंज मंडी परिषद में अभी जांच प्रक्रिया भी चल रही है।
पांच करोड़ तक पहुंच सकती है घोटाले की राशि
मण्डी समिति में घोटाले व गबन की राशि पांच करोड़ से भी अधिक हो सकती है। इस घोटाले में तत्कालीन मण्डी सचिव मो. इसराइल, स्व. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, अमरनाथ मण्डी सहायक, स्व. हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामदीन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है।
मामले में प्रभारी सचिव राजेश सिंह का कहना है कि यदि आरोपी कर्मचारियों द्वारा गबन की राशि नहीं जमा की गई तो सभी आरोपियों को एक नोटिस देने के बाद उन्हें निलम्बन की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
घोटाले का मामला संज्ञान में आया है। गबन व घोटाले की राशि सरकारी खजाने में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। राशि जमा न होने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई व केस दर्ज कराकर जेल भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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-हीरालाल, मंडी समिति के सभापति व एसडीएम
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