गोंडा। मेहनौन विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण सड़क जो जिले को सीधे श्रावस्ती से जोड़ती है उसे बने हुए मात्र छह माह ही हुए हैं। चार करोड़ की लागत से यह सड़क छह महीने में उखड़ गई। कमीशनखोरी की चपेट में इस तरह की और सड़कें हैं जो सरकार की विकास योजनाओं को मुंह चिढ़ा रही हैं।
सड़क पर उजड़ी गिट्टियां राहगीरों के सफर को मुश्किल बना रहीं हैं। सड़क पर बने गड्ढे किसी बड़े हादसे के लिए मुंह खोले हुए हैं। ऐसे में सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने का आरोप स्थानीय लोग तो लगा ही रहे हैं। इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अब मुंह छिपा रहे हैं।
खरगूपुर-इकौना पक्की सड़क से रमड़िया, हरिश्चंदपुर, छिटनापुर होते हुए रनियापुर संपर्क तक सड़क का निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष 2018-19 में राज्य सड़क योजना निधि से शुरू हुआ था।
इसकी लागत 395.62 लाख रुपये थी। इसका शिलान्यास स्थानीय जनप्रतिनिधि ने किया था। बनते-बनते यह सड़क छह महीने पहले पूरी हुई। लेकिन इस सड़क का निर्माण इतना घटिया हुआ है कि एक बरसात में यह सड़क उखड़ गई। यह मार्ग बहुत ही महत्वपूर्ण है।
उक्त मार्ग से विशुनापुर, बेलभरिया, कहला, लालनगर, परसदा,चौहट्टा, गोसाईपुरवा, अचलापुर, रनियापर, हरिश्चंदपुर, शिव सहायपुरवा, छिटनापुर आदि गांवों से पैदल, बाइक व चौपहिया वाहनों से लगभग 10 हजार राहगीरों का आवागमन होता है।
यह सड़क लोक निर्माण विभाग ने बनवाई थी। लेकिन रामलाल पुरवा व हरिश्चंदपुर गांव के पास सड़क कई जगह टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में रोष व्याप्त है। सड़क टूटने पर राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं खरगूपुर-वीरपुर सड़क बलुआ पुल तक की स्थिति बहुत ही बद्तर है। राहगीरों को गड्ढा व सड़क में अंतर ही नहीं पता चल रहा है। कई बार बाइक चालक गिरकर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन कार्यदायी संस्था द्वारा केवल रोड़ा डालकर कार्य की इतिश्री कर दी गई।
छिटनापुर के ग्राम प्रधान सुखराम वर्मा का कहना है कि यह सड़क बहुत दिनों से टूटी थी। कोई भी राजनीतिक व्यक्ति ध्यान नहीं दे रहा था। यदि किसी तरीके से सड़क बनकर तैयार हुई तो कमीशन खोरी की भेंट चढ़ गई। कमीशन में बन्दर बांट के चलते मजबूती से नहीं बनाई गई, जिससे एक वर्ष के अंदर टूट गई।
हरिचन्दपुर गांव निवासी समाज सेवक विश्वनाथ तिवारी का कहना है कि गांव उत्तर उनके खेत के पास सड़क काफी जर्जर होकर गढ्ढों में तब्दील हो गयी है। यहां खेत के पास बरसात के मौसम में पानी का ठहराव ज्यादा हो जाता है। तिवारी का आरोप है कि पानी निकास के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा यहां पुलिया का निर्माण कराया गया था, लेकिन बाद में एक पाइप निकालकर अलग डाल दिया गया। जिससे लगभग आधे सड़क पर गड्ढा हो गया है।
हरिश्चंदपुर गांव निवासी अभय राजन तिवारी का कहना है कि इस सड़क के लिए काफी मेहनत किया गया है। कई बार क्षेत्रीय सांसद, विधायक से मिलकर इसे बनवाने की मांग की गई थी। तब यह सड़क बनी, लेकिन इसमें पर्याप्त मैटेरियल का प्रयोग नहीं किया गया है। कार्यदायी संस्था द्वारा अभी बरसात से पूर्व ही बनाया गया था। लेकिन छह माह के अंदर ही टूट गई।
ग्राम पंचायत चौहट्टा के निवासी मैनुद्दीन खान का कहना है कि ठेकेदार व कार्यदायी संस्था की मिली भगत से मानक के अनुरूप मैटेरियल का प्रयोग नहीं किया गया और घटिया सड़क का निर्माण करा दिया गया, जिससे सड़क बनते ही छ: माह में टूट गयी।