गोंडा। सीएमओ कार्यालय के तीसरी मंजिल पर बने रिकार्ड रूम में मंगलवार को अचानक आग लग गई। इसकी चपेट में आकर कक्ष में रखे तमाम अभिलेख व दस्तावेज जलकर खाक हो गए। सूचना के बाद मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड टीम घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा सकी। आग लगने से पूरे परिसर में हड़कंप रहा। मौजूदा समय में विभाग में बीते पांच साल के दौरान उपकरणों से लेकर दवा तक की हुई खरीद से जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है। रिकार्ड रूम के जिस कक्ष में आग लगी उसमें कई महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें व अन्य दस्तावेजी रिकार्ड रखे थे। ऐसे में चुनाव परिणाम के पहले आग लगने की घटना को लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं।
मंगलवार की दोपहर एक बजे करीब सीएमओ कार्यालय के तीसरी मंजिल पर बने रिकार्ड रूम में अचानक आग लगने से अफरा तफरी मच गयी। सभी लोग कार्यालय से बाहर भागने लगे। जल्द ही आग की लपटों ने विकराल स्वरूप अख्तियार कर लिया। इससे यहां रखे तमाम कागजी दस्तावेज व अभिलेख जलकर राख हो गए। आग लगने के बाद कर्मचारी बिजली की सप्लाई बंद कर आग बुझाने की कोशिशों में जुट गए। इस बीच सूचना के बाद पहुंची अग्निशमन विभाग के दस्ते ने आग पर काबू पाकर पूरी तरह बुझाया।
कई मामलों की चल रही एसआईटी व विभागीय जांच
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड रूम में अचानक लगी आग को लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। यहां पहले से ही वित्तीय घोटाले से जुड़े कई मामलों की एसआईटी व विभागीय स्तर पर जांच चल रही है। कोरोना काल के दौरान बीते वर्षों में खरीदी गयी दवाएं व उपकरणों के दौरान व्यापक स्तर पर गड़बड़ी उजागर हुई थी। इस मामले में शासन स्तर से एसआईटी का गठन कर जांच करायी जा रही है। इसके साथ ही विभागीय स्तर पर भी जिला स्तरीय कमेटी बनाकर वर्ष 2017 से अब तक हुई खरीद से जुड़े बाकी मामलों की भी जांच चल रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कार्यालय में तैनात कुछ लोगों ने ही गड़बड़ी में शामिल होने का सबूत मिटवाने के लिए रिकार्ड रुम में आग लगाकर फाइलें जलाने की कोशिश की है।
एसआईटी ने तलब किए थे कागजी दस्तावेज
दवा व उपकरण खरीद की जांच पिछले दो सालों से चल रही है लेकिन अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। पिछले दिनों एसआईटी ने मामले की पड़ताल तेज करते हुए एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2020 के बीच हुई दवा खरीद संबधी रिकार्ड तलब किए थे। इस बीच चुनावी प्रक्रिया तेज हो जाने से जांच फिर से ठंडे बस्ते में चली गयी। अब फाइलों को जलने की घटना से एसआईटी व अन्य विभागीय जांचों को प्रभावित होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
जांच के घेरे में छह सीएमओ का कार्यकाल
- दवाओं व उपकरणों के खरीद फरोख्त की चल रही जांच के घेरे में पूर्व के छह सीएमओ का कार्यकाल था। इसमें डॉ. अमर सिंह कुशवाहा, डॉ. राकेश अग्रवाल, डॉ. उमेश सिंह यादव, डॉ. आभा आशुतोष, संतोष कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मधु गैरोला शामिल हैं। कोरोना संक्रमण काल में सरकारी दर से कई गुना महंगे दामों में दवाएं व उपकरणों की खरीद के आरोपों के कारण पूर्व सीएमओ डॉ. मधु गैरोला का कार्यकाल सबसे अधिक विवादित रहा था।
रिकॉर्ड रूम में शार्ट-सर्किट की आशंका कम
सीएमओ कार्यालय के जिस रिकार्ड रूम कक्ष में आग लगी वह तीसरे मंजिल पर एक कोने में स्थित है। इस कक्ष में एलईडी बल्ब के सिवाय कोई दूसरा बड़ा विद्युत यंत्र भी नहीं लगा है। ऐसे में शार्ट-सर्किट से आग लगने की संभावना काफी क्षीण नजर जा रही है। हालांकि अभी आग लगने के कारणों का पता पता नहीं चल पाया है। आग लगने से हुए नुकसान तथा कारण का आंकलन करने के लिए सीएमओ स्तर पर एक टीम गठित करने की बात कही जा रही है।
रिकार्ड रूम में लगी आग को फैलने से पहले ही बुझा लिया गया। आग बुझने के बाद अभिलेखागार का निरीक्षण करने पर अधिकांश दस्तावेज सुरक्षित मिले, जो अभिलेख जल गए हैं वह किससे संबधित हैं इसकी जानकारी के लिए एसीएमओ डॉ. एपी सिंह, अवर अभियंता सतीश चंद्र मिश्र, प्रशासनिक अधिकारी दिलीप सिंह, कमलेश पाल की संयुक्त टीम गठित की गई है। इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग से हुए नुकसान तथा आग लगने के कारण का पता चल पाएगा। डॉ. राधेश्याम केसरी, सीएमओ