गोंडा। देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में तिल के नकली तेल का गोरखधंधा चल रहा है। ऐसे में खाद्य व औषधि में प्रयोग आने वाला तिल का नकली तेल सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। आरोप है कि ब्रांड से मिलते-जुलते नामों को इस्तेमाल कर ग्राहकों से छल किया रहा है। एसपी व सिटी मजिस्ट्रेट समेत अधिकारियों से शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है।
इसी साल 24 अक्तूबर को कानपुर के गोविंद नगर थाने में तिल का तेल बनाने वाली कंपनी के निदेशक संजय सापरा ने ब्रांड के मिलते-जुलते नामों से नकली तेल बनाने के आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही पुलिस को बताया कि उनका उत्पाद काफी प्रसिद्ध है। मगर कानपुर के दो लोग ही उनके उत्पाद से मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल कर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर उनके उत्पाद के विश्वास को नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर देवीपाटन मंडल के जिलों में नकली उत्पादों की खेप पहुंच गई है। वहीं इसको लेकर कंपनी के निदेशक की ओर से साक्ष्यों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से मामले में शिकायत की गई है। आशंका है कि जिले के चारों तहसीलों में नकली तेल उत्पाद की तेजी से बिक्री हो रही है। नकली तेल का खेल जिले में तेजी से फल-फूल रहा है।
नकली उत्पादों के बाजार तौर पर देवीपाटन मंडल के जिलों को नया ठिकाना बनाया गया है। तिल के तेल के अलावा मसालों के उत्पाद के तौर पर देवीपाटन मंडल के जिले मुफीद माने जा रहे हैं। ऐसे में नकली उत्पादों को असली के मुकाबले लाकर करोड़ों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
जिला अभिहीत अधिकारी अजीत मिश्र ने बताया कि शिकायत पर बलरामपुर जिले से तिल के तेल का सैंपल लिया गया है। साथ ही नमूने को प्रयोगशाला में भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।