करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन कटान का खतरा बढ़ गया है। बुधवार को नदी ने करनैलगंज क्षेत्र के बहुवन मदार मांझा, मांझा रायपुर, बेहटा, पारा और परसावल के पास 300 बीघा से अधिक कृषि भूमि निगल ली। खाली खेतों के अलावा मक्का और गन्ने की खड़ी फसल भी नदी में समा गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कटान की रफ्तार बढ़ने से नदी की धारा एल्गिन-चरसड़ी बांध की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि सिंचाई विभाग के कर्मचारी बांध की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी और बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रभावित गांवों के किसान अपनी बची हुई जमीन को लेकर चिंतित हैं।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.69 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 38 सेंटीमीटर नीचे है। पिछले 24 घंटे में जलस्तर लगातार घटा है। 28 जुलाई की सुबह यह 106.06 मीटर, शाम को 105.85 मीटर और बुधवार सुबह 105.69 मीटर दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि जलस्तर घटने के बावजूद नदी का कुल डिस्चार्ज बढ़कर 1,88,091 क्यूसेक हो गया है। डिस्चार्ज बढ़ने के कारण मैदानी क्षेत्रों में कटान जारी है। फिलहाल कटान एल्गिन-चरसड़ी बांध से काफी दूरी पर है और विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
माझा क्षेत्र में नाव का इंतजार, कटान से बढ़ी परेशानी
विश्नोहरपुर। माझा क्षेत्र में बाढ़ का पानी घटने के बावजूद लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। दत्तनगर और साकीपुर के मजरे बाड़ी माझा में बुधवार को भी कटान हुआ। दयाशंकर यादव, दिनेश यादव और फतेहबहादुर अपनी जमीन नदी में समाने के बाद दूसरे की भूमि पर रहने को मजबूर हैं। दुर्गागंज माझा में सरयू करीब एक किलोमीटर तक किनारों को काट रही है।
गन्ने और धान की फसल वाले खेत लगातार नदी में समा रहे हैं। साकीपुर के चहलावा मजरे में अब तक सरकारी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीण बाउर यादव ने बताया कि लोग निजी नावों और पानी में पैदल चलकर आवागमन करने को मजबूर हैं। क्षेत्र में मगरमच्छों की मौजूदगी से खतरा और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नाव उपलब्ध कराने और कटान प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने की मांग की है।
सरयू नदी की स्थिति
एल्गिन ब्रिज जलस्तर: 105.69 मीटर
खतरे का निशान: 106.07 मीटर