गोंडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में कार्यरत संविदा कर्मियों के ईपीएफ खाते के हिसाब किताब में घालमेल का मामला सामने आया है। लाखों के घोटाले की आशंका वाले इस मामले में ईपीएफ धनराशि संविदा कर्मियों के खाते में जमा नहीं की गयी। इससे परेशान स्वास्थ्य कार्यकर्ता सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा परेशान हो रहे हैं। दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने सीएमओ को पत्र लिखकर तत्काल कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में भुगतान किए जाने का निर्देश दिया है।
जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत करीब 200 की संख्या में एएनएम, लैब टेक्नीशियन तथा फार्मासिस्ट तैैनात हैं। जिनका हर महीने औसतन ढाई हजार रुपया प्रत्येक कर्मचारी के मानदेय से काटकर इतना ही धनराशि विभाग की ओर से उनके खाते में जमा करना होती है। इसके बावजूद बीते छह माह से इन कर्मियों के हिस्से की कटौती का अंश कर्मचारियों के खाते में प्रदर्शित नहीं हो रहा है। कर्मचारियों को आशंका है कि उनके जमा कराए गए धन को किसी अन्य खाते में जमा कर घोटाले का प्रयास किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन सिंह ने सीएमओ को पत्र लिखकर कर्मचारियों के ईपीएफ खाते को अपडेट कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के तहत कार्यरत लगभग 200 कर्मचारियों के वेतन से हर माह ईपीएफ अंश के नाम पर हर माह करीब पांच लाख रुपय की कटौती विभाग द्वारा की जाती है। सरकारी अंश के साथ यह कटौती की राशि कर्मचारी के पीएफ फंड में जमा कराने की जिम्मेदारी डीपीएम एनएचएम, डैम व वित्त एवं लेखाधिकारी की है। बीते साल जुलाई माह से कर्मचारियों के वेतन से तो ईपीएफ के नाम पर धनराशि की कटौती तो हो रही है लेकिन उनके खाते में कटौती का अंश जमा नही हो रहा है।
घोटाले की आशंका को लेकर चेते मिशन निदेशक
स्वास्थ्यकर्मियों की ईपीएफ धनराशि जमा करने के मामले में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने 22 मार्च को मुख्य चिकित्साधिकारी को एक पत्र लिखकर कर्मियों के खाते में बकाया धनराशि जमा कराने का निर्देश भी दिया है। इसमें कहा गया है कि ईपीएफ का लंबित भुगतान को अपडेट कराने की कार्रवाई तीन कार्यदिवस में सुनिश्चित की जाए। ऐसा न करने पर शिथिलता बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।