गोंडा। स्वच्छ गोंडा, सुंदर गोंडा की राह में रोड़ा बनी जलनिकासी की समस्या फिर एक बार शहरियों के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना है। घरों के सामने गंदा पानी, चोक नालियों से आ रही बदबू से निजात पाने के लिए शहरवासी सीवर लाइन की मांग को लेकर वोट देने की बात कह रहे हैं। दस साल पहले जगी सीवर लाइन की उम्मीद अभी भी नहीं पूरी हो सकी। शहर के 27 वार्डों में रहने वाली दो लाख की आबादी गंदगी की जद में रहने को मजबूर है। वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जौकब के निर्देशन में 332 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन बनाए जाने का प्लान तैयार किया गया था। लेकिन एक दशक बीतने के बाद भी सीवर लाइन का निर्माण नहीं हो पाया। अमर उजाला की टीम ने जब मतदाताओं के मुद्दे पर बात किया तो अधिकांश लोगों ने सीवर लाइन का निर्माण कराना सबसे बड़ा मुद्दा बताया।
हर बार चुनाव के पहले उठता सीवर लाइन का मुद्दा
हर बार चुनाव से पहले सीवर लाइन की बात उठती है। इस बार भी उठ रही है। विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों से इस बार लोगों को उम्मीद है। शायद शहर के लोगों को इस बार सीवर लाइन मिल जाए। शहर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई कॉलोनियां हैं जो नगर पालिका क्षेत्र में नहीं हैं। इन कॉलोनियों की भी जलनिकासी की सही व्यवस्था नहीं है। सीवर लाइन के बाद व्यवस्था संभलेगी। अजय मिश्र, शिवपुरी कॉलोनी
दस वर्षों से हो रही सीवर लाइन की मांग
सीवर लाइन की मांग को काफी पुरानी है। वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के पहल से उम्मीद जगी थी,लेकिन अभी तक सीवर लाइन का सपना पूरा नहीं हो सका। लोगों के हाथ मायूसी ही आई। मनीष द्विवेदी, विष्णुपुरी कॉलोनी
आबादी बढ़ने से बढ़ी समस्या
सीवर लाइन शहर की जरूरत है। शहर की आबादी काफी बढ़ चुकी है। पानी निकासी की ठीक व्यवस्था नहीं है। मोहल्ले में छोटे तालाब गंदगी से लबालब है। अगर शहर में सीवर लाइन पड़ती है तो जलभराव से मुक्ति मिलने के साथ ही शहर साफ सुथरा भी हो जाएगा। वर्षों पुरानी यह मांग कब पूरी होगी शहर के लोगों का इसका इंतजार है। अखिलेश शुक्ल, आवास विकास कॉलोनी
सीवर लाइन पड़ने से स्वच्छ होगा शहर
शहर की आबादी करीब दो लाख तक पहुंच गई है जिससे सीवर लाइन शहर की बड़ी जरूरत हो गई है। कई समस्याओं का निस्तारण सीवर लाइन पड़ने से हो जाएगा। नगर पालिका के संसाधन भी बचेंगे। शहर साफ सुथरा होगा और माहौल भी सुधरेगा। अगर सीवर लाइन पड़ती है तो अच्छी बात है। हर बार की तरह इस बार भी यह चुनावी शिगूफा साबित हुआ तो शहर के लोगों को मायूसी मिलेगी। शासन स्तर पर पैरवी की जरूरत है। सोनू दूबे, आवास विकास कॉलोनी