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बगावत की गूंज से बने नए समीकरण, ध्रुवीकरण पर टिका भविष्य

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गोंडा। बलरामपुर के सादुल्लाहनगर विधानसभा क्षेत्र में शामिल रहा गौरा क्षेत्र वर्ष 2012 में हुए परिसीमन के बाद नए विधानसभा क्षेत्र के रूप में सामने आया। भाजपा ने एक बार फिर अपने वर्तमान विधायक प्रभात वर्मा पर ही भरोसा जताते उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है जबकि सपा ने प्रबल दावेदार माने जा रहे राम प्रताप सिंह को दर किनार कर युवा चेहरे के बतौर संजय विद्यार्थी को टिकट देकर बड़ा दांव खेला है। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह ने सपा से बगावत कर कांग्रेस के टिकट से मैदान में उतर कर चुनावी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया। कुर्मी व मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में पूर्व विधायक की बगावत ने चुनावी जंग के पुराने समीकरण बिगाड़ दिए है। इसके बाद त्रिकोणीय माने जाने वाले इस चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण को हारजीत की कुंजी माना जा रहा है।
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साल 2012 में पहली बार हुए चुनाव में इस सीट से मनकापुर राजघराने के कुंवर आनंद सिंह ने सपा प्रत्याशी के बतौर जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रभात वर्मा ने मोदी लहर के सहारे भारी अंतर से यहां से जीत हासिल की थी। गौरा की सियासत में मुस्लिम और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की खासा दखल रहती है। साल 2017 के चुनाव में पिछड़ी जातियों की एकजुटता के साथ ही मोदी लहर में हिंदू मतदाताओं की गोलबंदी ने ही भाजपा को धमाकेदार जीत दिलायी थी। इस दौरान सपा से चुनाव लड़ने वाले राम प्रताप सिंह का टिकट इस बार पार्टी ने काट दिया है। उनके स्थान पर नाई समाज से संजय विद्यार्थी को मैदान में उतारा। संजय को टिकट ऐसे मौंके पर दिया, जब साल 2017 में तीसरे स्थान पर रहे बसपा के अब्दुल कलाम मलिक भी सपा में आ चुके हैं। टिकट कटने के बाद राम प्रताप सिंह ने बगावत कर कांग्रेस का दामन थामा और चुनावी मैदान में उतर कर विरोधियों के लिए एक मजबूत चुनौती पेश की है।
मुस्लिम मतों के साथ ही उनकी नजर ऐसे अन्य पिछड़े वर्ग पर भी है, जो भाजपा से नाराज हैं। दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी सपा में टिकट बंटवारे के बाद उपजे विवाद को फायदेमंद मानकर अपने परंपरागत वोट बैंक को एकजुट बनाने में लगे हैं। बसपा ने निगार उस्मानी को टिकट देकर अनुसूचित जाति के साथ मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। इसके चलते ही मौजूदा परिदृश्य में विरोध, बगावत व घेराबंदी के बीच गौरा विधानसभा का चुनाव काफी रोचक होता दिखने लगा है। भाजपा के साथ ही सपा, बसपा व कांग्रेस भी अपनी जीत को लेकर हर दांव अजमाने में जुटी है। (संवाद)
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अनसुलझे सवालों से दावेदारों को घेर रहे मतदाता
गौरा में विधानसभा चुनाव के दौरान जनसमस्याओं से जुड़े अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशने के लिए मतदाता चुनाव मैदान में उतरे दावेदारों को घेरने में जुटे हैं। इसमें अधूरी व बदहाल सड़कों के साथ ही बिजली की समस्या से जुड़े सवाल बड़ी चुनौती बने हैं। छपिया के सुरेश कुमार कहते हैं कि मसकनवां को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हुए हैं। मानक पूरे होने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। भारत कहते हैं कि एक वर्ग विशेष को क्षेत्र में अपमानित होना पड़ा। सम्मान नहीं मिल सका। नरेंद्र कहते हैं कि कई सड़कों के निर्माण के दावे हुए लेकिन अभी तक अधूरे हैं। काम तो हुए, लेकिन गावों में आज भी सड़कों की समस्या बनी हुई है। बभनजोत के वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी। इसी तरह प्रमोद, राजेश व रामलोचन कहते हैं कि जनता तो सब को जान रही है, लेकिन इस बार फैसला चौंकाने वाला होगा। (संवाद)
मनकापुर में रहता गौरा का असर
गौरा क्षेत्र के चुनावी हलचल का असर मनकापुर विधानसभा में रहता है। इसके अलावा पड़ोसी जनपद बलरामपुर की उतरौला सीट पर भी यहां की चर्चाएं असर डालती हैं। दोनों विधानसभा सीटें सटी हुई हैं और कमोवेश मतदाताओं के समीकरण भी एक जैसे ही हैं। ऐसे में यहां के गतिविधियों की धूम वहां रहती हैं। इसके अलावा मनकापुर विधानसभा क्षेत्र में भी यहां की गूंज रहती हैं। इससे समीकरण प्रभावित होते हैं।
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कुल मतदाता 316088
कुर्मी 75 हजार
मुस्लिम 72 हजार
अनूसूजित जातियां 65 हजार
ब्राह्मण 57 हजार
क्षत्रिय 36 हजार
यादव 26 हजार
अन्य जाति 50 हजार
2017 का चुनाव परिणाम
प्रभात कुमार वर्मा भाजपा 72,455 मत जीते
राम प्रताप सिंह, सपा 42, 600 मत
अब्दुल कलाम मलिक, बसपा 38, 667 मत
तरुण चंद्र पटेल, कांग्रेस 2746 मत
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