गोंडा। जिला अस्पताल में मरीजों को अब किसी भी तरह की छोटी बड़ी सर्जरी के लिए तारीख पर तारीख पाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। अस्पताल में लंबे समय से चल रही शल्य चिकित्सकों की कमी सात नए डाक्टरों की तैनाती से काफी हद तक दूर हुई है। डाक्टरों के आने से अस्पताल में होने वाले शल्य क्रिया के मामलों ने भी रफ्तार पकड़ी है। अब यहां हर रोज 12 से 15 मरीजों का ऑपरेशन किया जाने लगा है। इससे प्रतीक्षा सूची खत्म होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
पिछले कुछ महीनों से जिला अस्पताल में जरनल सर्जन की कमी के कारण मरीजों को ऑपरेशन के लिए भटकना पड़ रहा था। दो सर्जन डॉ. डीएन सिंह व डॉ. सुधीर कुमार मौर्य ही अस्पताल में सर्जरी कार्य के लिए उपलब्ध थे। तीन माह पहले डॉ. डीएन सिंह सेवामुक्त हो गए, इससे मरीजों को ऑपरेशन के लिए तारीख पर तारीख मिलने से भटकना पड़ रहा था। इस दौरान सिर्फ आपातकालीन ऑपरेशन ही हो पा रहे थे। बीते दिनों जिला अस्पताल में जनरल सर्जन की संख्या बढ़ने से मरीजों की असुविधा दूर हुई है। जनरल सर्जरी के लिए डॉ. वीके गुप्ता, डॉ. सुधीर मौर्य, डॉ. जितेंद्र पांडेय व डॉ. पीडी गुप्ता तैनात हैं, जिससे अब हर रोज करीब दस से 15 मरीजों के ऑपरेशन हो रहे हैं। जनरल सर्जन के अलावा तीन आर्थो सर्जन, तीन आई सर्जन व एक ईएनटी की तैनाती भी बीते दिनों अस्पताल में हुई है।
महिला अस्पताल में भी बढ़ी डॉक्टरों की संख्या
गर्भवती महिलाओं को सीजेरियन प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में आठ डॉक्टरों की तैनाती है। जो पालीवार ओपीडी तथा सर्जरी प्रसव करती हैं। महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों में डॉ. सुषमा सिन्हा, डॉ. सुवर्णा कुमार, डॉ. शालू महेश, डॉ. गरिमा मिश्रा, डॉ. दीपमाला, डॉ. ज्योतिमा सिंह, डॉ. सौम्या चौबे व डॉ. अमित त्रिपाठी के अलावा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा सिंह भी मरीजों की सर्जरी करती हैं।
जिला अस्पताल में सर्जन की कमी लगभग दूर हो गई है। अब हर रोज औसतन 15 मरीजों का ऑपरेशन के अलावा करीब 1200 मरीजों को विभिन्न ओपीडी के माध्यम से इलाज मिल रहा है। डॉ सुरेंद्र रावत, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल