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30 साल बाद घोटाले के आरोपी इंजीनियर को चार्जशीट

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गोंडा। ये खबर भ्रष्टाचार के मामलों में अफसरों से रसूखदारों की सांठगांठ का नायाब नमूना है। देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में डीआरडीए के सहायक अभियंता ने 35 साल पहले लाखों रुपये का घोटाला किया था। इसकी भनक लगने पर डीएम ने सीडीओ को जांच सौंप दी। महज एक सप्ताह की जांच में तत्कालीन सीडीओ (आईएएस अफसर) ने 19 मामलों में 16 लाख के भ्रष्टाचार व कदाचार के प्रमाण पाए और रिपोर्ट सौंप दी।
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जांच अधिकारी ने घोटालेबाज इंजीनियर की बर्खास्तगी और गबन की रकम वसूलने की संस्तुति की, मगर शासन और सरकार में बैठे लोगों के रुचि न लेने व अदालत की दहलीज पर पहुंचने के कारण 30 साल तक ये मामला दबा रहा। अब योगी सरकार के कड़े रुख को भांपकर अधिकारियों ने फाइल खोल दी और 18 मई को आरोपी को आरोप पत्र देकर इस घोटाले की जांच मंडल के अपर आयुक्त प्रशासन को सौंपी है।
बहराइच के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में साल 1987-88 में तैनात रहे सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी (अब सीतापुर में तैनात) पर सरकारी कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व लाखों के गबन के आरोप लगे थे। तत्कालीन डीएम ने 21 नवंबर 1991 को शैलेंद्र को निलंबित कर तत्कालीन सीडीओ (आईएएस) एमवीएस रामी रेड्डी को जांच सौंपी थी।
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सीडीओ ने साल 1987-88 में 24 तालाबों की खुदाई के सापेक्ष 13 में कार्य पूरा न कराकर सात लाख 63 हजार 700 रुपये का गबन पाया। जांच अधिकारी ने इसमें विभागीय अवर अभियंता को भी आधे का हिस्सेदार माना। इसी साल डीपीएपी योजना के तहत नौ वनीकरण व 13 वृक्षारोपण के कार्य में भी बंदरबांट का खेल उजागर हुआ, जिसमें 10 कार्यों के नाम पर 15 लाख 29 हजार रुपये का फर्जी भुगतान पाया गया। इस लूटखसोट में विभागीय अवर अभियंता को भी आधे का हिस्सेदार माना गया।
विभिन्न कार्यदाई संस्थाओं को उपलब्ध कराने के लिए यूपी स्टेट कॉरपोरेशन ने फैजाबाद से मंगाई गई सीमेंट में से 74 हजार 138 रुपये की 1,423 बोरी सीमेंट के गबन की पुष्टि हुई। इसी प्रकार ब्लॉकों के अवर अभियंताओं को दिए जाने वाले टूल्स एवं इक्यूपमेंट वितरण में भी सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी ने 2.13 लाख रुपये का गबन किया। जांच अधिकारी ने आरोपी सहायक अभियंता से धनराशि वसूली की संस्तुति की। आरोपी अभियंता ने छोटे-छोटे कार्यों के लिए 41 हजार 921 रुपए अग्रिम के रूप में लिए लेकिन उसका हिसाब नहीं दे पाए।
आरोप है कि एनआरईपी व आरएसईजीपी योजना के तहत जनपद को आवंटित 26 क्विंटल गेहूं और 27.65 क्विंटल चावल ब्लॉकों को नियमानुसार न देकर मुख्यालय पर एक निजी गोदाम में तीन साल तक रखा, जिससे वह निष्प्रयोज्य हो गया। इस पर जांच अधिकारी ने 86 हजार 677 रुपये की वसूली के लिए आरसी जारी करने की संस्तुति की। यही नहीं तीन साल पुराने किराए के बिल का बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के शैलेंद्र ने भुगतान भी कर दिया था।
जांच में पता चला कि आरोपी सहायक अभियंता ने 13 जनवरी 1987 को डीआरडीए का 20 हजार 962 रुपये कीमत का एक कैमरा व 22 जनवरी 1987 को एक मोटरसाइकिल को अपने नाम पर निर्गत कराकर हड़प ली। आरोपी सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी को जांच में 16 लाख दो हजार 391 रुपये के गबन का दोषी पाया गया। इसके अलावा जांच अधिकारी ने आरोपी सहायक अभियंता को कई अन्य मामलों में भी दोषी पाया। जांच अधिकारी ने बड़ी धनराशि के गबन व गंभीर अनियमितताओं का दोषी मानते हुए आरोपी एई एसके त्रिपाठी को पदच्युत करने और गबन की गई रकम की वसूली की संस्तुति की थी।
देवीपाटन मंडल के अपर आयुक्त प्रशासन राकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपी सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी के खिलाफ शासन से जारी आरोप पत्र उन्हें प्राप्त करा दिया गया है। शासन के आदेशानुसार जांच की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। निर्धारित समय में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
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