गोंडा। विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से गरीबों के घर तक न्याय पहुंचाने के लिए विधिक सेवा सहायता कार्यक्रम चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार भी गरीबों के घर तक न्याय पहुंचाने का दावा करती है लेकिन जमीनी हकीकत ठीक इससे उलट है। धानेपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले गरीब रामफेर न्याय पाने के लिए दर दर भटकने को मजबूर है।
पृथ्वीपालगंज गांव के रहने वाले बुजुर्ग रामफेर का आरोप है कि दबंगों ने उसकी जमीन को बंजर बताकर कब्जा कर मकान बना लिया है। वह खाते की जमीन की पैमाइश के लिए तीन साल से राजस्व विभाग के कर्मचारियों की परिक्रमा कर रहा है, लेकिन पैमाइश नहीं कराई जा रही है।
एसडीएम, कानूनगो व लेखपाल से शिकायत कर थक चुके रामफेर शनिवार को समाधान दिवस में किसी बड़े अफसर की मौजूदगी न होने से शिकायत पत्र लेकर बैरंग वापस लौट गए। रामफेर का कहना है कि लेखपाल और कानूनगो सुनवाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए इन लोगों से शिकायत करना उसे ठीक नहीं लगता।
धानेपुर थाना क्षेत्र के पृथ्वीपालगंज ग्रांट गांव के रहने वाले रामफेर के मुताबिक बिहुरी से बलरामपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर उसके खाते की जमीन है। तीन साल पहले उसकी जमीन के कुछ हिस्से पर बगल के गांव के रहने वाले तीन लोगों ने मिलीभगत कर कब्जा कर लिया।
विरोध किया तो दबंगों ने जमीन को बंजर बता दिया। इसकी शिकायत लेकर रामफेर एसडीएम सदर के पास पहुंचा तो एसडीएम ने लेखपाल को मौके पर जाकर उसके जमीन की पैमाइश कर पत्थर लगाने का आदेश किया था। रामफेर को उम्मीद थी कि एसडीएम के आदेश के बाद उसकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन समाधान तो दूर लेखपाल मौके पर नहीं गया।
तब से लगातार बुजुर्ग रामफेर इस उम्मीद के साथ तहसील दिवस और समाधान दिवस में शिकायत लेकर पहुंचते हैं कि अफसर उसकी सुनवाई कर जमीन की पैमाइश करा देंगे, लेकिन राजस्व विभाग के कर्मचारी नहीं पसीज रहे हैं। रामफेर का कहना है कि विपक्षी उसकी जमीन को बंजर बता रहे हैं जबकि उसके खाते की जमीन है।
शनिवार को थाना समाधान दिवस में अपनी शिकायत लेकर रामफेर पहुंचे तो वहां कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं था। अफसरों के न मिलने से मायूस रामफेर लेखपाल को शिकायत दिए बगैर बैरंग लौट गए।
रामफेर ने बताया कि पैमाइश कराने की शिकायत लेकर थाने पर आए थे, लेकिन जिम्मेदार अफसर के न होने से उन्होंने शिकायत देना मुनासिब नहीं समझा। रामफेर का कहना है कि लेखपाल और कानूनगो उसकी शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगाकर वापस कर देते हैं। उन्हें शिकायत पत्र देना बेमानी है।