गोंडा। शहर में सरकारी भूमि, नालों, वक्फ की संपत्तियों आदि पर अवैध कब्जों का मामला अब तूल पकड़ रहा है। सरकारी भूमि पर कब्जा करके निर्माण कराने वालों की अब खैर नहीं है। जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्य राजस्व अधिकारी जयनाथ यादव की अध्यक्षता में एक विशेष टीम बनाई है।
फरमान जारी किया है कि अवैध निर्माण को चिह्नित कर उसे ढहाने की कार्रवाई करें। डीएम के फरमान के बाद अधिकारियों की टीम सक्रिय हो गई है। माना जा रहा है कि अब प्रशासन का बुलडोजर जल्द ही इन निर्माणों पर गरजेगा। इसके लपेटे में कई बड़े भी आ सकते हैं।
जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर कई सालों से मामले उठ रहे थे। साल 2019 में एक होटल को ढहाया भी गया था लेकिन उसके बाद से अवैध कब्जों का अभियान ढीला पड़ गया था। विधानसभा चुनाव में बुलडोजर की धूम मची तो अब प्रशासन भी तेवर में आ गया है। सबसे ज्यादा नजर में सिविल लाइन क्षेत्र है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण हुए हैं जिसकी पत्रावली एक अफसर के यहां एक साल से धूल फांक रही हैं।
वहीं बीते दिनों कुछ अवैध निर्माण को चिह्नित करके ढहाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। विस चुनाव के कारण अधिकारियों ने हाथ खींच लिए थे। अब एक बार फिर अवैध कब्जों का मामला तूल पकड़ रहा है। डीएम के आदेश के बाद अवैध निर्माण की पत्रावलियों का परीक्षण शुरू हो गया है।
जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। कमेटी ऐसे निर्माण को चिह्नित करेगी जो नजूल या फिर सरकारी जमीन पर किया गया है। इसके साथ ही कब्जेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जानी है। इसके साथ ही कमेटी में नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर के साथ ही लोक निर्माण विभाग को शामिल किया है ताकि अवैध निर्माण को ढहाने के लिए बुलडोजर की कमी न आने पाए। इस तरह योजनाबद्ध तरीके से अवैध निर्माण को ढहाने की तैयारी की गई है।
प्रशासन की ओर से शुरू किए जा रहे अभियान में कई कार्रवाइयों के दौर से अवैध कब्जेदारों को गुजरना होगा। उनके निर्माण को ढहाने के साथ ही भू-माफिया के रूप में चिह्नित भी किया जाएगा। इसके साथ ही जुर्माना भी जमा करना होगा। प्रशासन ने पूरे अभियान में पुलिस के सहयोग का भी निर्देश दिया है जिससे किसी तरह का अवरोध अभियान में न आने पाए।