चार सौ करोड़ की लागत से मैजापुर शुगर मिल में एशिया का सबसे बड़ा एथेनॉल प्लांट लगेगा। इस कार्ययोजना को अमल में लाने की कवायद तेज हो गयी है। प्लांट लगाने के लिए मिल संचालकों ने किसानों से मंहगी दर पर जमीन खरीदकर कर बाउंड्रीवाल बनाने का काम शुरू कर दिया है।
इस प्लांट से 400 किलो लीटर एथेनॉल प्रतिदिन बनाया जायेगा। तैयार एथेनॉल का 20 प्रतिशत डीजल व पेट्रोल में मिलाकर कच्चे तेल के आयात को कम किया जाएगा। इस प्लांट का उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र के सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार पाने का अवसर भी मिलेगा। मिल प्रबंधन ने अगले साल पेराई सत्र 2022-23 में चीनी नहीं बनाने का निर्णय लिया है। एथेनॉल का उत्पाद शुरू हो जाने से मिल को काफी लाभ होगा। डीजल व पेट्रोल की कीमत अधिक होने से मिल को अधिक लाभ की उम्मीद है।
चीनी मिल के आसपास किसानों को भी इस प्लांट के लगने की कार्य योजना से काफी लाभ होगा है। क्षेत्रीय किसान असद खान व अवधेश तिवारी ने बताया कि प्लॉट के लगाने के लिए मिल प्रबंधन ने किसानों की जमीन मौजूदा रेट से तीन गुना अधिक दाम में खरीदी है। इससे किसानों में उत्साह है। इस प्लांट के लगने से किसानों की मुश्किलें बहुत हद तक कम हो जाएंगी। वह अपने गन्ने को आसानी से मिलों को बेंच पाएंगे।
चीनी मिल गन्ने के रस से चीनी बनाती थी, लेकिन अब उस रस को सीधे एथेनॉल बनाने में प्रयोग किया जायेगा। तैयार एथेनॉल को पेट्रोल व डीजल में मिला कर पेट्रोलियम पदार्थों के आयात को कम कर विदेशी मुद्रा के भंडार को बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसान अपने गन्ने का भुगतान समय से पा सकेंगे। देश में अभी तक केवल 5 प्रतिशत एथेनॉल पेट्रोल व डीजल में मिलाया जा रहा है क्योंकि मांग के अनुरूप एथेनॉल तेल कंपनियों को नहीं मिल पा रहा। देश की पहली एथेनॉल से चलने वाली बाइक टी वी एस कंपनी ने बनाई है इस बाइक में पेट्रोल डीजल नही बल्कि एथेनॉल फ्यूल का उपयोग होता है।