गोंडा। पंचायतों में कामकाज देखने के लिए 1204 गांवों में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। दो चरणों में जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने 505 पंचायतों में सहायकों के भर्ती को अनुमोदन दे दिया है। इसके साथ ही अन्य पंचायतों के प्रस्तावों पर भी मंथन करके उन्हें अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इसी माह पंचायत सहायकों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति प्रस्तावों का परीक्षण करके सूची जारी कर रही है। अभी पंचायत सहायकों की नियुक्ति एक साल के लिए होगी। प्रधान व सचिव कार्य पर संतोष जताएंगे तो भी दो साल के लिए ही सेवाओं को बढ़ा सकेंगे। जिले के 505 पंचायतों में सहायक जल्द ही कामकाज संभालेंगे।
पंचायतों की ओर से सहायकों के चयन का प्रस्ताव किया गया है। पंचायतों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों की ब्लाक के बाद अब जिले स्तर पर परीक्षण हो रहा है। जिन पंचायतों के मामलों में कोई विवाद नहीं है, उन्हें जिलाधिकारी स्वीकृति दे रहे हैं। जिससे जल्द से पंचायत सहायकों के चयन की कार्रवाई पूरी हो सके।
अधिकारियों का कहना है हर बिंदुु की गहराई से पड़ताल करके ही चयन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हाईस्कूल और इंटर के अंकों पर मेरिट तय करके चयन की कार्रवाई प्रधान की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक कमेटी ने किया और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी परीक्षण के बाद अनुमोदन कर रही है।
पंचायत सहायकों को चयन के बाद प्रशिक्षण भी दिया जाना है। जिससे वह विकास के कार्यों को आसानी से समझ सकें। पंचायत सहायक आम लोगों के लिए पंचायतों में बने पंचायत सचिवालयों पर उपस्थित रहेंगे।
पंचायतों में चलने वाली विकास योजनाओं के कामकाज में सहायकों की अहम भूमिका रहेगी। वर्तमान समय में एक सचिव के जिम्मे करीब आठ गांवों का प्रभार है। सहायक मिलने के बाद उन्हेें कार्य करने में सुगमता मिलेगी और पंचायत के लोगों को राहत मिलेगी।
जरूरी कार्य वह पंचायत सहायक से कह सकेंगे और पंचायत सहायक सचिव तक बात पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही पंचायतों के डाटा अपडेट रहेंगे। इससे पंचायत सहायकों की भूमिका आम लोगों और पंचायत के बीच एक सेतु की तरह होगी।
पंचायत सहायकों के चयन में पंचायत विभाग काफी सावधानी बरत रहा है। आवेदकों के अंक पत्रों का परीक्षण करने के साथ ही मिलने वाली शिकायतों का भी परीक्षण होता है। जिन प्रस्तावों पर विभाग को पूरी तरह तसल्ली होता है उसी के प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। विभाग भी मान रहा है कि मामला नियुक्ति से जुड़ा है, इसलिए हर बिंदु पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है।