गोंडा। पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में दर्ज मुकदमे में दो पुलिसकर्मियों को अदालत से राहत नहीं मिली। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष न्यायाधीश नित्या पांडेय ने आरोपी चंद्रशेखर तिवारी और बालकराम वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस महानिदेशक को वर्ष 2018 में बहराइच में पासपोर्ट सत्यापन में रिश्वत लिए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) कार्यालय बहराइच में पासपोर्ट आवेदकों से सीधे और एजेंटों के माध्यम से रिश्वत लेने के आरोपों की पुष्टि हुई।
जांच रिपोर्ट और वीडियो फुटेज के आधार पर वर्ष 2021 में तत्कालीन एसएसआई चित्रसेन सिंह, उपनिरीक्षक चंद्रशेखर तिवारी, उपनिरीक्षक ज्ञानेंद्र कुमार राय, हेड कांस्टेबल बालकराम वर्मा और आरक्षी सत्येंद्र यादव समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आरोपी चंद्रशेखर तिवारी निवासी मकासीपुर, थाना राजेसुल्तानपुर, जिला अंबेडकरनगर तथा बालकराम वर्मा निवासी काकुम्मर, थाना सुरसा, जिला हरदोई ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। बचाव पक्ष ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाने का आरोप लगाया। वहीं अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों व आरोप पत्र का अवलोकन करने के बाद अदालत ने चंद्रशेखर व बालकराम वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।