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Gonda News: योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं 5,836 दिव्यांग विद्यार्थी

Sun, 13 Jul 2025 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। समेकित शिक्षा के तहत जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों के पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसे में ये बच्चे सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं। वहीं, बच्चों का दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अभिभावकों को सीएमओ कार्यालय तक चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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शैक्षणिक सत्र 2025-26 में एक जुलाई तक जिले के परिषदीय विद्यालयों में कुल 7,464 दिव्यांग बच्चे नामांकित हुए हैं। इनमें से महज 22 प्रतिशत यानी कि 1,608 बच्चों के पास ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र है। 88 प्रतिशत यानी 5,836 दिव्यांग बच्चों के पास प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसे में इन बच्चों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल है। अभिभावकों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉकों तक चक्कर काटना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है।
जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) राजेश कुमार सिंह का कहना है कि बच्चों का दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर प्रत्येक बीआरसी से प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान 21 जुलाई से 11 अगस्त तक बच्चों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाए जाएंगे।
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नवाबगंज व बभनजोत में सबसे अधिक बच्चे प्रभावित
नवाबगंज में 455 बच्चों के सापेक्ष महज 28 और बभनजोत में 355 के सापेक्ष 23 बच्चों के पास ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र है। बभनजोत के साथ ही आकांक्षी ब्लॉक पंडरीकृपाल में 472 के सापेक्ष 101 और रुपईडीह में 660 के सापेक्ष 189 बच्चों के पास ही प्रमाणपत्र है। झंझरी में 565 के सापेक्ष जिले में सबसे अधिक 237 बच्चों के पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र है। दूसरे स्थान पर परसपुर ब्लॉक में 523 बच्चों के सापेक्ष सबसे अधिक 171 बच्चों के पास प्रमाणपत्र है।
भीड़ के चलते परीक्षण के लिए करना होता है इंतजार
ऑनलाइन आवेदन के बाद रोजाना बड़ी संख्या में लोग दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचते हैं। इनमें तमाम बच्चे व परिषदीय स्कूल के विद्यार्थी भी शामिल हैं। भीड़ व अव्यवस्था के चलते लोगों को इंतजार करना पड़ता है। कई बार विशेषज्ञ चिकित्सकों के अवकाश पर रहने से प्रमाणपत्र के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं।
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