ढाई साल से नये इंडिया मार्का हैंडपंप लगाना बंद है और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। विधायक के प्रस्ताव पर ही हैंडपंप रिबोर कराए जा सकते हैं। यह कार्य भी नहीं हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था लड़खड़ा गई है।
2850 हैंडपंपों को रिबोर होने का इंतजार है। शासन ने ढाई साल पहले इंडिया मार्का हैंडपंप लगाना बंद कर दिया और पानी टंकी को वरीयता दे रहा है। पहले से लगे इंडिया मार्का हैंडपंप का रखरखाव ग्राम पंचायतों को मिलने के बाद से जल निगम के अवर अभियंताओं की ब्लॉक से छुट्टी कर दी गई।
इसके बाद ग्राम पंचायतों के पास कोई तकनीकी स्टाफ नहीं बचा। ब्लॉक व न्याय पंचायत स्तर पर कोई मिस्त्री नहीं है। ऐसे में हैंडपंप के पानी का परीक्षण नहीं हो पा रहा है। शुद्धता की जानकारी आम लोगों को नहीं हो पा रही है।
इंडिया मार्का हैंडपंप को रिबोर कराने के लिए विधायक एक सूची सीडीओ को देंगे। इस सूची की प्रशासनिक स्वीकृति डीएम देगें। इसके बाद अधिशासी अभियंता क्षेत्रवार अवर अभियंता को हैंडपंप रिबोर की सूची देते हुए सामान मुहैया कराएंगे।
ग्रामीण अंचल की आबादी 32 लाख 8890 है। इनमें 16 ब्लॉक शामिल हैं। रुपईडीह में 250, इटियाथोक में 200, पड़रीकृपाल में 150, झंझरी में 200, मुजेहना में 150, कटराबाजार में 200, हलधरमऊ में 150, कर्नलगंज में 150, परसपुर में 200, बेलसर में 150, तरबगंज में ़100, वजीरगंज में 150, नवाबगंज में 150, मनकापुर में 200, बभनजोत में 250, छपिया में 200 हैंडपंप खराब खड़े हैं। इन हैंडपंपों क परीक्षण ही नहीं हो पा रहा है कि इनकी मरम्मत होगी या रिबोर ।
गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व स्कूल के कई हैंडपंप खराब हैं, लेकिन यह रिबोर होंगे या मरम्मत, यह ग्राम पंचायतें तय नहीं कर पा रही हैं। तरबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगा हैंडपंप खराब होने पर सीएमओ ने पत्र लिखा, लेकिन समस्या का निस्तारण नहीं हो पाया।