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गन्ना दाम बढ़ने की खुशी फीकी कर रही 211 करोड़ की बकायेदारी

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गोंडा। सरकार ने चुनावी वर्ष में किसानों को लुभाने के लिए भले ही गन्ना के दाम में 25 रुपया कुंतल की बढ़ोत्तरी की हो लेकिन निरंकुश चीनी मिल संचालक सरकार की मंशा धता बता रहे हैं। किसानों को देय करोड़ों की बकायेदारी गन्ना मूल्य में हुी वृद्धि की खुशी को फीका कर रही है।
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किसान नकदी फसल के रूप में गन्ने की खेती करते हैं। सरकार भले ही 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान का दावा करती हो लेकिन जिले की कुन्दरखी चीनी मिल पर अभी भी किसानों के हिस्से की 211 करोड़ की बकायेदारी चुकाना बाकी है।
गन्ना बेचने के बाद भुगतान के लिए किसान चीनी मिल व गन्ना समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इससे जिले में पांच प्रतिशत गन्ने का रकबा भी कम हो गया है। देवीपाटन मंडल गन्ना किसानों का गढ़ है। यहां करीब ढाई लाख हेक्टेयर में नकदी फसल गन्ने की खेती की जाती है।
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किसानों को गन्ने की फसल बोआई से लेकर आपूर्ति तक सरकार पारदर्शिता बरतते हुए सर्वे, भुगतान पर काम कर रही है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी किसानों के दर्द पर मरहम नहीं लगा पा रहे हैं। जिले में 60 से 70 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है और इसकी आपूर्ति बलरामपुर यूनिट की दतौली मनकापुर, बभनान, मैजापुर तथा कुंदरखी बजाज चीनी मिल को होती है।
पेराई सत्र 2020-21 में किसानों ने जिले में करीब सवा तीन लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों को कर दिया। बीसीएम ग्रुप की चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया, जबकि बजाज ग्रुप की मिलों ने हर साल की तरह इस बार भी दो अरब से ऊपर की बकाएदारी कर दी।
जिले में कुल किसानों की संख्या करीब साढ़े पांच लाख है लेकिन, गन्ने की खेती 1.70 लाख किसान करते हैं। पेराई सत्र 2020-21 में जिले के किसानों ने 218 लाख क्विटल गन्ने की आपूर्ति गोंडा समेत अन्य जिलों की चीनी मिलों को की थी। 1032 करोड़ रुपये के सापेक्ष अभी तक 821 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान हो सका है। अभी भी चीनी मिलों पर 211 करोड़ रुपये की बकायेदारी है।
मनकापुर रोड स्थित बजाज ग्रुप की कुं दरखी चीनी मिल ने अभी तक मात्र 21 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान किया है। इस मिल ने किसानों से 268 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा था लेकिन, भुगतान सिर्फ 57 करोड़ रुपये का किया है। अकेले इसी चीनी मिल पर 211 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य की बकायेदारी है। मैजापुर चीनी मिल , मनकापुर तथा बभनान ने अपना शत प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है।
किसान सुधांशु उपाध्याय कहते हैं कि अब गन्ने की खेती नकदी फसल में नहीं रह गई कई महीनों की उधारी के चलते उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। किसान दिनेश पांडेय कहते हैं कि सरकार ने किसानों के हित को देखते हुए 25 रुपये प्रति कुंतल गन्ने की मूल्य में बढ़ोत्तरी की है लेकिन चीनी मिलों पर अंकुश लगाए तभी किसानों का भला हो सकता है।
किसान गिरीश कुमार कहते हैं कि गन्ना नकदी फसल है। इसकी खेती का मतलब कि गन्ना किसानों को समय से दाम मिल जाए। किसान मणिकांत कहते हैं कि हमने बजाज ग्रुप की कुंदरखी चीनी मिल में गन्ना बेंचा था लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
- कुंदरखी चीनी मिल को छोड़कर सभी चीनी मिलों ने भुगतान कर दिया है। इसके लिए कुंदुरुखी चीनी मिल के अधिकारियों को नोटिस जारी की गई है। जल्दी किसानों का बकाया पूरा भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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- ओपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी गोंडा
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