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उल्टी-दस्त से 19 बीमार, सांस के तीन मरीजों की मौत

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गोंडा। भीषण गर्मी व लू से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसे में उल्टी-दस्त व सांस के मरीजों से जिला अस्पताल पट गया। सोमवार को सुबह से लेकर रात तक इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का तांता लगा रहा। सर्वाधिक मरीज गर्मी जनित बीमारियों के आ रहे हैं। सोमवार को डायरिया के लक्षण वाले 19 मरीजों को जिला अस्पाल में भर्ती कराया गया। वहीं, सांस की बीमारी के चलते जिला अस्पताल में भर्ती तीन मरीजों की मौत हो गई।
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जिले मेें बेतहाशा पड़ रही गर्मी के सितम से हर कोई परेशान है, वहीं अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक में गर्मी जनित बीमारियों से ग्रसित मरीजों का तांता लगा हुआ है। सोमवार को जिला अस्पताल में 1,266 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया। इनमेें अधिकांश मरीज मौसम जनित बीमारियों से पीड़ित थे। वहीं, इमरजेंसी में डायरिया के 19 मरीजों को वार्डों में भर्ती कराया गया।
वहीं, जिला अस्पताल में भर्ती लक्ष्मनपुर जाट निवासी मंगरे पाल, लोड़ियाघाटा निवासी मुन्नालाल तथा बिछुड़ी निवासी पंकज कुमार की मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक ये तीनों सांस की बीमारी से पीड़ित थे। वहीं, गौसिया निवासी राहुल शुक्ल की चार माह की बेटी काजल शुक्ला, बनघुसरा की प्रियंका, छेदी पुरवा की मान्या, दुर्गा नगर के शुभम, बेलवा बहुता के ध्रुव नारायन समेत 19 मरीजों को डायरिया के लक्षण के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती अधिकतर बच्चे उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में 20 बेडों पर बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इधर हर दिन भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है जबकि डिस्चार्ज होने वालों की संख्या कम है। इससे चिल्ड्रेन वार्ड मरीजों से फुल हो गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में खानपान में अनियमितता के कारण गर्मी जनित बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों को बोतल का दूध पिलाने से उल्टी-दस्त व बुखार की आशंका रहती है। निमोनिया से पीड़ित दो बच्चे भी चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराए गये हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित ने बताया कि गर्मी अधिक है। तापमान बढ़ा है। ऐसे में अभिभावक बच्चों पर अधिक ध्यान दें और सतर्कता बरतें। उल्टी-दस्त के मरीजों को तत्काल अस्पताल ले जाकर चिकित्सक को दिखाना चाहिए। घरेलू उपचार भी करते रहें। पानी उबालकर पिलाएं। हल्का भोजन करें। बच्चों को धूप से बचाएं।
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