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लड़की ने फोन कर दूल्हे को बुलाया और कर ली शादी

Fri, 19 Apr 2013 02:40 PM IST
शाहगंज (जौनपुर)/संवाददाता
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समधियों के बीच हुए विवाद से रिश्ता टूट जाने से दुखी लड़की ने खुद दूल्हे को बुलाया और शहर के मैहर देवी मंदिर में उससे शादी रचा ली।
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लड़की वालों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लड़के पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया।

मामला उत्तरप्रदेश के वाराणसी जनपद का है। पुलिस ने लड़के के मामा को हिरासत में लिया तो नवदंपती कोतवाली पहुंच गए।

कोतवाली के मंदिर में गुरुवार को दोबारा शादी हुई और न चाहते हुए भी दोनों के मां बाप ने आशीर्वाद दिया। इसी के साथ मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।

बड़ागांव निवासी जोखन लाल गुप्त ने अपनी बेटी मोना का रिश्ता सुल्तानपुर के कादीपुर कोतवाली के बड़कापुर गांव में रमापति के बेटे दिनेश कुमार गुप्त के साथ तय किया था।

दोनों परिवारों ने शादी के कार्ड रिश्तेदारों और परिचितों को बांट दिए थे।

चार महीने पहले तय रिश्ते के तहत 26 अप्रैल को बारात आनी थी। इस बीच लड़का और लड़की के पिता के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। लड़की के पिता ने कहा कि अब शादी नहीं होगी।
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जब लड़की को पता चला कि थोड़ी सी बात पर रिश्ता टूट रहा है तो उसने दूल्हे को फोन किया। दोनों ने तय किया कि अब घर वालों को नहीं बताया जाएगा।

नौ अप्रैल को दोनों घर से लापता हो गए। 15 अप्रैल को वे जौनपुर शहर पहुंचे। यहां उन्होंने मैहर देवी मंदिर में सात फेरे ले लिए।

उधर, लड़की के लापता होने से हैरान पिता ने अपने भावी दामाद दिनेश गुप्ता को नामजद करते हुए कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया।

कोतवाली पुलिस ने दोनों की तलाश की। दोनों नहीं मिले तो लड़के के मामा राम आसरे गुप्ता को कोतवाली उठा लाई।

राम आसरे ने ही शादी तय कराने में अगुवाई की थी। मामा को हिरासत में लिए जाने की सूचना पर नवदंपती कोतवाली पहुंचे।

पुलिस ने दोनों के माता पिता को भी बुलाया। कोतवाली में लड़की ने कहा कि बहुत बड़ी बात नहीं थी।

समधियों के बीच केवल अहम का टकराव था। यदि रिश्ता टूट जाता तो और बदनामी होती। बदनामी से बचने के लिए ही उसने दूल्हे को बुलाकर विवाह कर लिया। फिर भी कोतवाली में घंटों पंचायत चली।

आखिरकार दोनों के मां बाप आशीर्वाद देने को राजी हुए। कोतवाली के मंदिर में दोबारा मंडप सजा। यहीं दोनों ने फिर से सात फेरे लिए।

वरिष्ठ उप निरीक्षक इस्मामुल हक खान का कहना था कि बच्चे आपस में सहमत थे। फिर भी दोनों परिवारों को समझाने में काफी वक्त लगा।
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