उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने लखनऊ और नोएडा में अंबेडकर स्मारकों के निर्माण में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के लिए मायावती सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी को जिम्मेदार ठहराया है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) को दिए गए बयान में कुशवाहा ने कहा कि स्मारकों के निर्माण से संबंधित सारे फैसले ‘उच्च स्तर’ और निर्माणदायी संस्था के मंत्री ने ही लिए थे।
बाबू सिंह का यह बयान ईओडब्ल्यू की उस जांच रिपोर्ट का हिस्सा है जो बुधवार को उसने लोक आयुक्त को सौंपी है।
लोक आयुक्त अभी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। इस पर आगे की कार्यवाही के बारे में फैसला अगले सप्ताह किया जाएगा।
लोक आयुक्त ने स्मारक निर्माण में गड़बड़ियों को लेकर ईओडब्ल्यू द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट का परीक्षण शुरू कर दिया है।
लोक आयुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा के मुताबिक रिपोर्ट बड़ी है इसका अध्ययन करने में वक्त लगेगा। रिपोर्ट पर आगे की कार्यवाही के बारे में निर्णय अगले सप्ताह ही किया जाएगा।
मेहरोत्रा का कहना है कि ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट में बाबू सिंह कुशवाहा का बयान काफी अहम है। उन्होंने सब कुछ नसीमुद्दीन के मत्थे मढ़ा है।
पूछताछ में बाबू सिंह ने बताया कि स्मारकों के लिए पत्थरों का चयन नसीमुद्दीन की ही देखरेख में किया गया और पर्यवेक्षण भी उन्हीं का था। जहां तक पत्थरों की दरों का सवाल है तो इसका निर्धारण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया था जिसके मंत्री नसीमुद्दीन थे।
कुशवाहा ने साफ किया कि इस मामले में उनकी सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं थी। स्मारकों के निर्माण से संबंधित सारे कार्य विभागीय मंत्री की निगरानी में उनके नियंत्रण वाले विभागों द्वारा कराया गया।
सामानों की आपूर्ति और स्मारकों में हाथी व मूर्तियां लगाने का निर्णय भी नसीमुद्दीन का ही था।