दो दशक में शहर से सटे इलाके विकसित हुए हैं। अनियोजित ढंग से 12 नई कालोनियां भी बस गई हैं लेकिन नगर पालिका परिषद क्षेत्र का सीमा विस्तार नहीं होने के कारण इन इलाकों में आधार भूत सुविधाएं नहीं हैं। इसकी वजह से नई कालोनियों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि बरसात के मौसम में नये विकसित क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है।
शहर से सटे रौजा, चंद्रशेखर नगर, खोवा मंडी, आलमपट्टी, फुल्लनपुर, मिश्रवलिया, चंदन नगर, मिट्ठनपारा आदि इलाकों का अनियोजित विकास हुआ है। ये इलाके नगर पालिका क्षेत्र से सटे हैं लेकिन नगरपालिका में शामिल नहीं हैं। इससे इन क्षेत्रों की करीब 35 हजार आबादी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इन इलाकों में नाली, सड़क, पेयजल, बिजली आदि की अपेक्षित व्यवस्था नहीं है। वहीं, नगर पालिका का 1995 से सीमा विस्तार नहीं हुआ है। वर्ष 2013 में नगर पालिका ने सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन सीमा विस्तार नहीं हो सका।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी एक लाख 10 हजार है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्र से करीब 91 हजार वोट डाले गए थे। पांच साल पहले नगर पालिका क्षेत्र का परिसीमन हुआ था और वार्डों की चौहद्दी तय की गई थी। शहर के सभी 25 वार्डों में से प्रत्येक में औसतन 4000 से 4500 आबादी रहती है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान अध्यक्ष के प्रतिनिधि विनोद अग्रवाल का कहना है कि प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या और जरूरतों के हिसाब से योजना बनती है। शहर से जुड़ी कुछ ग्राम पंचायतों के होने से उनकी भी सेवाओं का बोझ नगर पालिका पर है। अभी शहर की आबादी डेढ़ लाख के करीब है। इनमें करीब 35 हजार आबादी नगर पालिका परिषद से जुड़ी है। अगर शहर से सटे इलाकों को नगर पालिका में शामिल कर दिया जाए तो बजट और सेवाओं में विस्तार होगा। पिछले दिनों रौजा, चंद्रशेखर नगर, इंदिरा नगर आदि क्षेत्रों में स्थित अनियोजित कालोनियों में जलभराव से लोगों को परेशान होना पड़ा था। इन ग्राम पंचायतों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से नगर पालिका को जनरेटर लगाकर जलनिकासी में सहयोग करना पड़ता था।
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नगर पालिका क्षेत्र के सीमा विस्तार को लेकर वर्ष 2013 में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन उस पर शासन स्तर से कोई दिशानिर्देश नहीं आया। वर्ष 1995 के बाद शहरी सीमा क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब समय की मांग है कि पालिका सीमा से सटे खोवा मंडी, न्यू इंदिर नगर कालोनी, रौजा आदि को नगर पालिका में शामिल किया जाए। - सरिता अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष।
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होटल, रेस्टोरेंट, स्कूल तेजी से खुले
पिछले 20-25 सालों में शहरी आबादी के साथ तेजी से होटल, रेस्टोरेंट, मैरेज हॉल और स्कूल तेजी से खुले हैं। नगर पालिका क्षेत्र में 50-55 होटल, रेस्टोरेंट और मैरेज हाल हैं। इसके अलावा नगर पालिका क्षेत्र से सटे इलाकों में 20-25 होटल, रेस्टोरेंट और मैरेज हाल हैं। इसी तरह से शहर और उसके इर्द-गिर्द करीब 50-55 स्कूल हैं। इन स्थानों पर बिजली, पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा का बोझ शहरी प्रशासन पर ही पड़ता है।