राजा को खबर तक नहीं और भीलों ने बांट लिए वन कहावत को चरितार्थ किया है, तहसील जखनियंा के अधिकारियों और कर्मचारियों ने। जखनियां विकासखंड के ग्राम पंचायत बिजहरा का एक नया मामला प्रकाश में आया है। ग्राम प्रधान को पता ही नहीं और ग्राम पंचायत के पोखरी (तालाब) को मत्स्य पालन करने के लिए दस वर्ष के लिए पट्टा कर दिया गया। इसका पता तब चला जब ग्राम प्रधान रामपूजन राजभर अमृत सरोवर के तहत पोखरी की खुदाई कराने लगे तो गांव के कोमल एवं रबिता देवी सामने आ गए और बताया कि पोखरी मेरे नाम से मछली पालने के लिए पट्टा हैं।
ग्राम प्रधान रामपूजन राजभर ने बताया की तहसील स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिली-भगत से ग्राम पंचायत से बिना प्रस्ताव पास कराए तथा ग्राम प्रधान एवं भूमि प्रबंधन समिति के बिना संज्ञानित किए मनमाने ढंग से पारदर्शिता पर पर्दा डाल कर पट्टा आवंटित किया जा रहा है। गौरतलब हो कि जखनिया विकासखंड के बिजहरा ग्राम सभा के गाटा संख्या 171 तथा 207 पोखरी को बीते पांच नवंबर 2021 को ग्राम पंचायत को बिना सूचना दिए कोमल व रबिता देवी के नाम से पट्टा कर दिया गया। मालूम हो कि आराजी गाटा संख्या 207 का क्षेत्रफल दो एकड़ से भी अधिक है। जिसको मात्र पचास हजार रुपये में दस वर्ष के लिए पट्टा आवंटन कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है ।ग्राम समाज की भूमि के आवंटन के लिए ग्राम पंचायत की खुली बैठक आयोजित कर भूमि प्रबंधन समिति के प्रस्ताव पारित करने के बाद पट्टा आवंटित किया जाता है। वहीं पोखरी और तालाब से प्राप्त धनराशि का तीसरा हिस्सा को तहसील द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत को देना पड़ता है। जबकि जखनियां तहसील दारा 1997 से आज तक किसी भी ग्राम पंचायत के खाते में उक्त ग्राम पंचायत के पोखरी तालाब के नीलामी का पैसा जमा नहीं किया गया है। इस संबंध में नायब तहसीलदार सत्येंद्र मौर्या ने बताया कि ग्राम प्रधान इस संबंध में प्रार्थना-पत्र दें, जिसकी जांच कर कार्रवाई होगी।