गाजीपुर/सुहवल। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत खस्ता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ज्यादातर केंद्रों पर बच्चों और गर्भवर्ती माताओं को योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिसंख्य आंगनबाड़ी केंद्रों के अपने भवन नहीं हैं या हैं भी तो जर्जर हाल में हैं। इससे गर्भवती माताओं और नौनिहालों को कुपोषणमुक्त करने एवं पुष्टाहार वितरण आदि में दिक्कत आती है।
रेवतीपुर ब्लॉक में कुल 203 आगंनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। इनमें करीब 21 हजार नौनिहाल पंजीकृत हैं। महज 31 केंद्र ही अपने भवन में संचालित होते हैं। 119 प्राथमिक विद्यालय में, 12 माध्यमिक विद्यालय, 17 पंचायत भवन और 24 किराए के भवन में संचालित होते हैं। ब्लॉक के सभी केंद्रों पर 1826 कुपोषित और 119 अतिकुपोषित बच्चे हैं। जबकि नौ हजार के आसपास सामान्य बच्चे हैं। दूसरी ओर विभाग कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। केंद्रों को संचालित करने के लिए वर्तमान में 171 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही हैं। जबकि अभी 32 पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में 122 सहायिकाओं के पद हैं, जिनमें से 67 रिक्त चल रहे हैं।
हरिश्चंद्रपुर आगंनबाड़ी केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस केंद्र पर करीब 80 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें एक अतिकुपोषित एवं तीन कुपोषित हैं। केंद्र के चारों ओर घास फूस होने के साथ-साथ भवन जर्जर हो चुका है। दीवारों पर वाल पेंटिंग, योजनाओं की जानकारी आदि नजर नहीं आती।
कालूपुर गांव स्थित आगंनबाड़ी केंद्र भी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। यहां करीब 100 नौनिहाल पंजीकृत हैं। इनमें दो बच्चे अतिकुपोषित और दो कुपोषित हैं। यहां भी केंद्र की दीवारों पर योजनाओं की जानकारी से संबंधित वाल पेंटिंग का पता नहीं है।
सीडीपीओ प्रशांत सिंह ने कहा कि विभाग का प्रयास ब्लॉक के गांवों को पूरी तरह से कुपोषणमुक्त करना है। इसके लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जिन केंद्रों के भवन जर्जर हैं, उन्हें दुरुस्त करने के साथ नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा।