गाजीपुर में सपा-सुभासपा का प्रदर्शन
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धरने में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी शामिल हुए। कहा कि सरकार का अपराध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। भाजपा सरकार में समाजवादियों एवं उनके सहयोगी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय और उत्पीड़न किया जा रहा है।
यह सरकार अन्याय और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को पुलिस एवं गुंडों की लाठी गोली के बल पर कुचलना चाहती है। इस सरकार से न्याय की उम्मीद करना बेकार है। इस प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। यदि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। धरना प्रदर्शन के अंत मे चार सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा गया।
कार्यक्रम में विधायक ओमप्रकाश सिंह, डॉ वीरेंद्र यादव और संग्राम यादव, आशुतोष सिन्हा, सुभासपा के जिलाध्यक्ष लल्लन राजभर, बेदी राम, विधायक जैकिशन साहू, प्रभु नारायन यादव, जगदीश कुशवाहा, राम किशुन यादव, विधायक मन्नू अंसारी, प्रभाकर जायसवाल, डॉ बलिराम राजभर आदि मौजूद रहे।
विधायक ओमप्रकाश राजभर मंगलवार को क्षेत्र में भ्रमण के दौरान करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के मानसपुर पहदरिया गांव गए थे। वहां कुछ लोगों से उनका विवाद हो गया था। इसके बाद विधायक और उनके समर्थकों ने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए धरना दिया था।
विधायक का आरोप था कि 20-25 लोग लाठी-डंडे लेकर आए और उनसे मारपीट करने की कोशिश की। इस पर पुलिस ने 16 लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसके बाद राजभर कड़ी सुरक्षा के बीच गांव से चले गए। फिर दूसरे पक्ष के लोगों ने भी विधायक व उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ तहरीर दी थी।
इसमें ओमप्रकाश राजभर, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों पर अभद्रता करने, चारागाह की जमीन पर जानवर नहीं चराने की धमकी देने का आरोप लगाया था। उधर, बुधवार को सुभासपा ओर से जिलाधिकारी एमपी सिंह को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर हमले का आरोप लगाते हुए सुरक्षा बढ़ाने और विधायक राजभर समेत पार्टी के 16 लोगों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की।