बीते 22 अगस्त को रामनिवास की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उसे आरआर सैनिक हॉस्पिटल दिल्ली में शिफ्ट किया गया। जहां उसका आईसीयू में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान बुधवार रात करीब सवा दस मृत्यु हो गई। तबीयत खराब होने की सूचना पर उनकी पत्नी पिंकी यादव और बड़े भाई भटिंडा में तैनात सेना के जवान रविंद्र यादव दिल्ली पहुंच गए थे।
राम निवास के मौत की सूचना रविंद्र यादव ने ही अपने बड़े भाई विरेंद्र यादव को दी। इधर, घटना की जानकारी होते ही परिजनों सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृत सेना के जवान के माता-पिता का पूर्व में देहांत हो चुका है। उनके बड़े भाई बृजभूषण यादव और वीरेंद्र यादव घर पर ही रहकर खेती का काम करते हैं। जबकि दो भाई रविंद्र यादव और कमलेश यादव सेना में तैनात हैं।
रामनिवास की पत्नी पिंकी यादव एक सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। इनके दो पुत्र विनय (12) साल और विनीत(4)हैं। परिजनों ने बताया कि पार्थिव शरीर दिल्ली से एंबुलेंस द्वारा पैतृक आवास पर 27 अगस्त तक आने की संभावना है।
मृत सेना के जवान रामनिवास के बड़े भाई वीरेंद्र यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मांग किया कि इस घटना की जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि 20 अगस्त को पठानकोट में दौड़ सुबह 6 बजे से आयोजित थी, लेकिन अधिकारियों के बिलंब से आने पर दौड़ 11 बजे दिन से शुरू हुई।
इसके कारण तेज धूप और गर्मी से सभी दौड़ने वाले 40 सैनिकों की तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि पांच सैनिकों की मौत भी तत्काल होने की बात बताई जा रही है, जो काफी चिंतनीय है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई होनी चाहिए।
सेना के जवान रामनिवास यादव पिछले 10 जून को छुट्टी लेकर 25 दिन के लिए घर आए थे। वह बीते पांच जुलाई को अपने रेजिमेंट के लिए घर से निकला थे। रामनिवास यादव अपने सभी भाइयों में काफी मिलनसार और हंसमुख थे। वह दौड़ का में काफी पारंगत थे। यही कारण था कि उन्हें मैराथन दौड़ के लिए पठानकोट भेजा गया था। उनकी मौत की सूचना पर पाकर घर पर गांव सहित लोगों के आने जाने वालों की भीड़ लगी हुई थी।