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अब गिरे की तब गिरे की स्थिति में पहुंच चुके हैं कई सरकारी भवन

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जिले में कई सरकारी कार्यालयों के भवन जर्जर हो गए हैं। इनसे हमेशा हादसों का भय बना रहता है, लेकिन विकल्प के अभाव और भवनों की दशा सुधारने की पहल न होने के कारण अधिकारी एवं कर्मचारी इन भवनों में खतरे के साए में काम करने को विवश हैं। यही हाल रहा तो अब गिरे की तब गिरे की स्थिति में पहुंच चुके इन भवनों से कभी भी हादसे हो सकते हैं। कुछ माह पहले जिले के बहरियाबाद एवं बीते दिनों सैदपुर क्षेत्र में विद्यालय का छज्जा एवं गेट का खंभा गिरने की घटना में मासूमों की मौत की घटना इसी तरह की लापरवाही का नतीजा है।
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शहर के साथ ही विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कई जर्जर भवन हैं। इनमें से कई सरकारी हैं तो कुछ निजी भी हैं। जिले के कई परिषदीय विद्यालयों के परिसर में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन स्थित हैं। अब तक करीब 420 ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया गया है जो जर्जर हैं या निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके हैं। इनमें अब तक करीब चार दर्जन विद्यालयों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही ध्वस्तीकरण किया गया। जबकि शेष की प्रक्रिया जारी है। विभाग की मानें तो ऐसे विद्यालयों की अनुमानित लागत काफी अधिक है। इस कारण इस प्रक्रिया को अभी पूरा करने में दिक्कतें आ रही है। शहर के जिला पूर्ति कार्यालय परिसर स्थित विभिन्न सरकारी कार्यालयों के भवनों की हालत भी दयनीय है। पूर्व में विभिन्न कक्षों की दीवारों का प्लास्टर गिरने आदि की घटना हो चुकी है। इसके चलते कर्मचारी खौफ के साए में काम करने को विवश हैं। मौधा संवाददाता के अनुसार सैदपुर नगर में पुराना डाक भवन, खाद-बीज कार्यालय, बीडीओ कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के आवासीय भवनों की स्थिति भी दयनीय है। ये जर्जर भवन अक्सर हादसे का सबब बने रहे हैं। कहीं न कहीं जर्जर भवनों का मलबा सड़क पर गिरने की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं। इन जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन भी बेखबर है।
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