ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए गांवों में बनाए गए अधिकांश हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (स्वास्थ्य कल्याण केंद्रों) की हालत भी इस भीषण गर्मी में खराब हो गई है। बिना बिजली कनेक्शन और बिना सरकारी सुविधाओं के इन केंद्रों की हालत खराब है।
सैदपुर परिक्षेत्र में कुल 12 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। जिसमें डहराकला, होलीपुर, भुजहुंवा, मुड़ियार, ऊचौरी, सौना और डहन आदि सेंटरों पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ आफिसर) की तैनाती की गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कुछ स्थानों पर अभी तक भवन का लोकार्पण तक नहीं हुआ है। जिसके कारण उन्हे नजदीक के स्वास्थ उपकेंद्रों के जरिए संचालित किया जा रहा है। वहीं मौधा सहित सौना, ऊचौरी और भुजहुंवा कुछ केंद्रों पर भवन का निर्माण तो वर्षों पूर्व ही पूरा करा लिया गया। लेकिन बिजली, पानी जैसी सुविधाओं से वे अभी भी महरूम है। गांव के लोगों ने बताया कि वेलनेस सेंटर के निर्माण के समय बताया गया था कि यहां सामान्य जांच अथवा उपचार की व्यवस्था नि:शुल्क रूप से उपलब्ध होगी। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते वेलनेस सेंटर के जरिए ग्रामीणों को स्वस्थ रखने की योजना हवा हवाई साबित हो गई है।
छह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर सीएचओ की तैनाती कर दी गई है। शेष केंद्रों पर चिकित्सकों व स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को पत्र के जरिए सूचित किया गया है। सुधार शीघ्र ही नजर आएगा।
डा. संजीव कुमार सिंह, अधीक्षक, सीएचसी सैदपुर
वेलनेस सेंटर में यह मिलेगी सुविधा
मौधा। इन हेल्थ एंड वेलनेस केंद्रों में मातृत्व, शिशु, किशोर स्वास्थ्य, टीकाकरण, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कैंसर, अंधत्व, श्रवण बाधित रोग, संचारी रोग प्रबंधन एवं उपचार, गैर संचारी रोग प्रबंधन एवं उपचार, ओरल हेल्थ, मेंटल हेल्थ, योगा और एक्सरसाइज, काउंसिलिंग, स्कूल हेल्थ एजुकेशन व आपातकालीन चिकित्सा जांच व सुविधाएं आदि उपलब्ध होंगी।
सेंटरों पर नहीं रुकते स्वास्थ्य कर्मी
मौधा। स्वास्थ्य उप केंद्रों व हेल्थ वैलनेस केंद्रों में बिजली सहित अन्य सुविधाओं का उचित प्रबंध न होने से अपने तैनाती वाले केंद्रों पर कोई स्वास्थ्य कर्मी ठहरना नहीं चाहता है। इससे लोग इमरजेंसी सेवाओं से भी वंचित हो जा रहे हैं। जबकि इस संबंध में सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उप केंद्रों व हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी अपने केंद्रों पर ही रात्रि विश्राम करेंगे। जहां पर हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर क्रियाशील हैं। वहां कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को अधिक से अधिक ओपीडी करनी होगी। लेकिन सुविधाओं के अभाव में सेंटरों पर कर्मियों के लिए रुकना संभव नहीं होता है। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है।
बिना बिजली कनेक्शन के मौधा का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
मौधा। सोमवार को सुबह 11:00 बजे स्थानीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थिति काफी बदहाल मिली। बिजली कनेक्शन सहित सेंटर को मिलने वाली अन्य सुविधाएं नदारद मिली। न ही कोई स्टाफ या चिकित्सक की तैनाती यहां है। निर्माण के दो वर्ष बाद ही सेंटर का दरवाजा और खिड़कियां टूट चुकी हैं। लोगों ने बताया कि इसका भवन बनते समय ग्रामीणों को बड़ी आशा थी कि स्वास्थ विभाग इस सेंटर के जरिए बीमारों की जांच व ईलाज करेगा।
सौना में बुनियादी सुविधाएं नदारद
मौधा। मंगलवार को सुबह 9:30 पर सौना स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की पड़ताल की गई। यहां बिजली का कनेक्शन है। लेकिन न कोई अधिकारी है और न ही कोई स्टाफ है। साथ ही बिजली से चलने वाले उपकरण व अन्य संसाधन यहां से गायब हैं। सेंटर के चारो तरफ इतना कूड़ा करकट और अपशिष्ट जमा है कि दिन में ही भवन की ओर जाने में डर लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि जब टीका लगने का समय होता है तो माह में एक दो बार सेंटर खुलता है।
भुजहुंवा में है सरकारी सुविधाओं की दरकार
मौधा। मंगलवार को सुबह 10:10 पर भुजहुंवा गांव का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की पड़ताल की गई। लाखों रूपयों का बना यह सेंटर धूल फांक रहा है। नाम को बिजली कनेक्शन है। लेकिन कमरों में पंखे और बल्ब तक नदारद हैं। जांच व ईलाज के लिए यहां पहुंचने वालों को निराशा ही हाथ लगती है। इसके जरिए ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की योजना हवा हवाई होकर रह गई है। यहां जांच करने के नाम पर न ही कोई उपकरण है और न ही कोई सुविधा।
बिना बिजली कनेक्शन के ऊचौरी गांव में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
मौधा। मंगलवार को पूर्वान्ह 11:00 बजे ऊचौरी स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की पड़ताल की गई। यहां गैर संचारी रोगों की जांच और उपचार के लिए क्षेत्र के ऊचौरी गांव में स्थापित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुद ही बीमार है। यहां भी ग्रामीणों को मिलने वाली साधारण सुविधाएं नदारद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि टीका लगने के दिन ही सेंटर खुलता है। सेंटर स्थापित करने के पीछे शासन की मंशा लोगों को उनके घरों के नजदीक ही सामान्य बीमारियों की जांच व उपचार उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।