मानसून के पहले जर्जर भवन चिह्नित किए जाते हैं। इसके बाद जान-माल के लिए खतरनाक भवनों को ढहाया जाता है। लेकिन यह काम केवल कागजों पर ही हो रहा है। सिर्फ बेसिक विभाग में 346 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके ध्वस्तीकरण और नीलामी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। यहीं नहीं स्वास्थ्य विभाग में दो दर्जन से ऊपर उपकेंद्र और पीएचसी के भवन और खाद- बीज के गोदामों की स्थिति काफी खराब है, लेकिन अब तक न तो नोटिस जारी की गई और न ही उनके ध्वस्तीकरण को लेकर इन विभागों द्वारा कोई ठोस कदम ही उठाया जा सका है।
जिले में कई सरकारी कार्यालयों के भवन जर्जर हो गए हैं। इनसे हमेशा हादसों का भय बना रहता है, लेकिन विकल्प के अभाव और भवनों की दशा सुधारने की पहल न होने के कारण अधिकारी एवं कर्मचारी इन भवनों में खतरे के साए में काम करने को विवश हैं। यही हाल रहा तो अब गिरे की तब गिरे की स्थिति में पहुंच चुके इन भवनों से कभी भी हादसे हो सकते हैं। कई परिषदीय विद्यालयों के परिसर में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन स्थित हैं। अब तक करीब 420 ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया गया है जो जर्जर हैं या निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके हैं। इनमें अब तक महज 74 विद्यालयों की नीलामी के साथ ही उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकी है। शेष 346 की नीलामी एवं उसके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं की जा सकी है। विभाग की मानें तो ऐसे विद्यालयों की अनुमानित लागत काफी अधिक है। इस कारण इस प्रक्रिया को अभी पूरा करने में दिक्कतें आ रही है। शहर के जिला पूर्ति कार्यालय परिसर स्थित विभिन्न सरकारी कार्यालयों के भवनों की हालत भी दयनीय है। पूर्व में विभिन्न कक्षों की दीवारों का प्लास्टर गिरने आदि की घटना हो चुकी है। इसके चलते कर्मचारी खौफ के साए में काम करने को विवश हैं। मौधा संवाददाता के अनुसार सैदपुर नगर में पुराना डाक भवन, खाद-बीज कार्यालय, बीडीओ कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के आवासीय भवनों की स्थिति भी दयनीय है। ये जर्जर भवन अक्सर हादसे का सबब बने रहे हैं। कहीं न कहीं जर्जर भवनों का मलबा सड़क पर गिरने की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं। इन जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन भी बेखबर है। बेसिक शिक्षाधिकारी हेमंत राव ने बताया कि नीलामी की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूर्ण कराकर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इधर स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डा. केके वर्मा ने बताया कि भवनों को चिन्हत कर जल्द ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
छज्जा एवं गेट गिरने से मासूमों की जा चुकी है जान
गाजीपुर। जिले के बहरियाबाद एवं सैदपुर क्षेत्र में करीब छह माह पूर्व विद्यालय का छज्जा एवं गेट का खंभा गिरने की घटना में मासूमों की मौत की घटना इसी तरह की लापरवाही का नतीजा है। बीते फरवरी माह में गोपालपुर गांव निवासी रिद्धी यादव(11) मां के साथ शरीफपुर गांव स्थित नाना होरी यादव के घर आई थी। गांव के कुछ बच्चों के साथ प्राथमिक विद्यालय के पास खेल रही थी। बच्चे विद्यालय के गेट से झूलने लगे। अचानक गेट का खंभा गिर गया और रिद्धी की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। बीते दिसंबर माह में बहरियाबाद थाना क्षेत्र के सलेमपुर बघाई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के शौचालय के दरवाजे पर लगा छज्जा गिरने से आदित्य (5) की दबकर मौत हो गई थी।