आयुष्मान योजना के पात्रों को गाजीपुर जिले में ही उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 34 अस्पतालों को संबद्ध तो कर दिया गया, लेकिन 16 अस्पताल ऐसे हैं, जिनमें तीन वर्ष बाद भी एक भी मरीज का उपचार नहीं हो सका है। जिन 18 अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का उपचार हुआ है, उनमें भी बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भटकने पर मजबूर कर रहा है। यही वजह है कि योजना से जुड़े जिले के अस्पतालों से अधिक भुगतान का आंकड़ा गैर जनपदों के अस्पतालों का है।
आर्थिक रूप से कमजोर जनपद के सात लाख 88 हजार 750 लोगों का चयन कर उन्हें आयुष्मान योजना की पात्रता सूची में शामिल किया गया, ताकि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए उन्हें परेशान न होना पड़े। जिला एवं महिला अस्पताल सहित 16 सरकारी अस्पतालों को भी संबद्ध किया गया। विभिन्न तहसीलों एवं शहरी क्षेत्रों के 18 निजी अस्पतालों को भी आयुष्मान योजना में शामिल किया गया। जिस उद्धेश्य से इन सभी अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया, उस पर 16 सरकारी एवं निजी अस्पताल खरे नहीं उतर सके। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शहर के पुलिस लाइन रोड, चंद्रशेखर नगर, स्टेशन रोड, बड़ीबाग एवं खजुरिया स्थित पांच निजी अस्पताल अब तक आयुष्मान योजना के एक भी पात्र मरीज का उपचार नहीं कर सके हैं।
सरकारी अस्पतालों में बरुईन, बिरनो, गौड़ऊर, जखनिया, करंडा, कासिमाबाद, खानपुर, मनिहारी, मुुहम्मदाबाद, सादात और सुभाखरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी स्थिति है। इन अस्पतालों का आंकड़ा तो शून्य है, जबकि संबद्ध 13 निजी और पांच सरकारी अस्पताल की स्थिति भी खराब है। सरकारी अस्पतालों में तो साधारण बीमारियों का ही इलाज हो पाता है। निजी अस्पतालों में भी बेहतर उपचार न मिल पाने पर मरीज गैर जनपदों का सहारा लेते हैं। अब तक 11021 पात्रों ने उपचार कराया। इसमें करीब चार हजार 634 लोगों को गैर जनपद के संबद्ध निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। भुगतान के आंकड़ों को देखा जाए तो जनपद से संबद्ध अस्पतालों को पात्रों का उपचार करने के लिए तीन करोड़ 49 लाख 31 हजार 150 रुपये का भुगतान हुआ और गैर जनपदों के अस्पतालों को चार करोड़ 88 लाख 48 हजार 214 का भुगतान किया गया।
सर्जरी की नहीं है व्यवस्था
आयुष्मान योजना से जुड़े सरकारी एवं निजी अस्पतालों में सर्जरी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में योजना के पात्रों को गैर जनपदों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आवागमन के लिए आर्थिक क्षति झेलनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने और सर्जरी की व्यवस्था बेहतर न होने का रोना रोकर अपना पल्ला झाड़ लेता है।
आयुष्मान मित्रों की तैनाती को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। साथ ही जिन अस्पतालों में एक भी उपचार नहीं हुआ है, इसको लेकर भी संचालकों से बात कर आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी ली जाएगी। जनपद में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से काफी प्रभाव पड़ रहा है। - डॉ. हरगोविंद सिंह, सीएमओ