गाजीपुर। आयुष्मान योजना से संबद्ध सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने से पात्रों का मोहभंग हो चुका है। वजह यहां चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव है। लाभार्थी योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। 10 हजार 805 लाभार्थियों में से सिर्फ 75 ने ही सरकारी अस्पतालों में उपचार कराया है। हैरत की बात यह है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पांच लाख 95 हजार 156 लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड नहीं बन सका है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कितने सक्रिय हैं, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर और पांच लाख तक की नि:शुल्क चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले में 28 अगस्त 2018 को आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया गया था। इसके तहत एक लाख 57 हजार 750 पात्र परिवारों के सात लाख 88 हजार 750 लाभार्थियों को शामिल किया गया था। साथ ही इन लाभार्थियों को उपचार मुहैया कराने के लिए 16 सरकारी एवं 18 निजी अस्पतालों को संबद्ध किया गया। बावजूद इसके स्थिति यह हुई कि संबद्ध सरकारी अस्पतालों में शामिल जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के साथ 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव के चलते पात्रों का मोहभंग होने लगा। इन अस्पतालों में सिर्फ डायरिया, मलेरिया, बुखार के अलावा सामान्य बीमारियों का ही उपचार होता है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की भीड़ जिले के संबद्ध 18 निजी अस्पतालों और गैर जनपदों में बढ़नी शुरू हो गई। योजना के संचालन से लेकर अब तक तीन वर्ष में केवल 75 लाभार्थियों ने ही सरकारी अस्पतालों में उपचार कराया, जबकि 10 हजार 730 ने निजी अस्पतालों में उपचार कराया। योजना के सभी लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड अब तक नहीं बन सका है, जबकि महकमा गांव-गांव कैंप लगाकर कार्ड बनाने का दावा करता है, बावजूद इसके बड़ी संख्या में पात्र परिवार के लाभार्थी गोल्डन कार्ड से वंचित हैं।