बकरीद (ईद उल अजहा) नजदीक है। बाजारों में रौनक छा गई है। सात जून को मुस्लिम समुदाय के लोग पशुओंं की कुर्बानी देंगे। दिलदारनगर का बकरा बाजार खरीदारों से गुलजार है। यहां लोग अपनी पसंद के बकरे की तलाश में आ रहे हैं। कुछ लोग बेहतर नस्ल और सौदे के लिए ग्रामीण इलाकों का भी रुख कर रहे हैं।
बाजार में जामुनापारी (उत्तर प्रदेश के इटावा जिले और आसपास के क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है), सिरोही (राजस्थान के सिरोही जिले और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है।), बरबरी (मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में पाई जाती है) तोतापरी जैसी नस्लों के बकरों की मांग ज्यादा है। जामुनापारी नस्ल के बकरे 20,000 से 30,000 रुपये तक बिक रहे हैं, जबकि सिरोही नस्ल के बकरों की कीमत 15,000 से 25,000 रुपये के बीच हैं। भारी-भरकम बकरों की कीमत भैंस से भी अधिक बताई जा रही हैं।
व्यापारी भी इस बार बाजार में प्रतिस्पर्धा को देखते हुए बकरों की खास सजावट कर रहे हैं। सिर पर रंग-बिरंगे पट्टे, गले में बेल वाले बकरे आकर्षण के केंद्र हैं। कुछ ग्राहक बकरों पर उर्दू में नाम भी लिखवा रहे हैं। खरीदार नेसार अहमद खान वारसी, ने बताया कि इस बार बाजार में बकरों की विविधता है। लोग बकरों की कीमत के साथ उसका स्वास्थ्य और नस्ल देखकर खरीदारी कर रहे हैं।