एआरटीओ कार्यालय का निर्माण जल्द शुरू होगा। इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। एआरटीओ कार्यालय के निर्माण पर 13.29 करोड़ हजार रुपये खर्च होंगे। एआरटीओ कार्यालय का निर्माण जंगीपुर थाने के पास चिह्नित जमीन पर होगा।
इससे पहले शासन स्तर से एआरटीओ कार्यालय के निर्माण के लिए 13 करोड़ 29 हजार 37 लाख रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। जंगीपुर थाने के पास एआरटीओ कार्यालय का निर्माण चिह्नित 7000 वर्ग फीट जमीन पर होगा। टेंडर प्रक्रिया और जमीन भराई का कार्य पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था के रूप में निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सीएनडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस) को सौंपी गई है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि बहुत जल्द निर्माण शुरू होगा। वहीं चिह्नित जमीन लो लैंड की श्रेणी में आने से सबसे पहले मिट्टी भराई का कार्य किया गया। अब बारी निर्माण कार्य शुरू होने की है। एआरटीओ कार्यालय का निर्माण पूरा होने पर विभाग को सहूलियत मिलेगी।
एआरटीओ कार्यालय का निर्माण शुरू होगा तो उसी क्रम में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके तहत बरसात में बारिश का पानी भवन की छत पर इकट्ठा किया जाएगा। उसे शोधित कर पेयजल से लेकर विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। एआरटीओ बिल्डिंग के निर्माण के साथ ही सारथी हाल, चार रिकॉर्ड रूम, पार्किंग स्थल, विभिन्न कक्षों का निर्माण होगा।
जिले में लगभग 45 वर्ष से एआरटीओ कार्यालय संचालित हो रहा है। इसके पूर्व एआरटीओ कार्यालय से संबंधित कार्यों के लिए लोगों को वाराणसी जाना पड़ता था। जिले में सबसे पहले आपूर्ति कार्यालय के पास स्थित सरकारी बिल्डिंग में इसका संचालन शुरू हुआ लेकिन भीड़ और जाम को देखते हुए बड़ीबाग स्थित किराये के भवन में इसका स्थानांतरण कर दिया गया। साथ ही भवन भी जर्जर था। कुछ वर्षों के बाद कार्यालय पाॅलिटेक्निक कॉलेज के पास फिर से किराये के भवन में चली गई। कोरोना काल के बाद से और वर्तमान में एआरटीओ कार्यालय का संचालन तुलसीसागर से आगे अतरौली के एक निजी भवन में संचालित हो रहा है।
जब जंगीपुर में एआरटीओ कार्यालय का निर्माण पूरा हो जाएगा तो जिला मुख्यालय के लोगों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कार्यों के लिए लगभग सात किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। क्योंकि जिला मुख्यालय से जंगीपुर की दूरी इतनी ही है।