गाजीपुर। बलिया, मऊ, आजमगढ़ और बिहार प्रांत के बक्सर जनपद के मरीजों के उपचार का मध्य केंद्र तीन वर्ष से गाजीपुर बना है। यहीं वजह है कि तीन वर्ष छह माह में 16 लाख से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है। यहीं नहीं रेफर मरीजों का आंकड़ा भी घटकर सिर्फ तीन प्रतिशत है। जबकि इन गैर प्रांत व जनपदों से प्रतिदिन 300 से ऊपर मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक करीब 70 प्रतिशत मरीज ठीक होने का मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने दावा किया है, वहीं कैंसर की प्राथमिक जांच की सुविधा मिलने से हायर सेंटरों में मरीजों का तत्काल उपचार शुरू हो रहा है।
लंबे समय से चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित और चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जनपद को मेडिकल काॅलेज के स्थापित होने के बाद राहत मिलनी शुरू हो गई। वर्तमान समय में पांच फिजिशियन, विशेषज्ञ चिकित्सकों में आंख के तीन, दांत के छह, ईएनटी के तीन, जनरल सर्जन सात, हड्डी रोग विशेषज्ञों की संख्या पांच हैं। जबकि हृदय और अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञों की तैनाती न होने से मरीजों को गैर जनपद और प्रांत की ओर रूख करना पड़ रहा है।
मेडिकल काॅलेज प्रशासन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में दो लाख 12 हजार, 2022 में चार लाख दो हजार, 2023 में छह लाख 25 हजार और 2024 में जनवरी से लेकर अगस्त तक चार लाख 75 हजार मरीजों की अब तक ओपीडी हुई है। वहीं गंभीर सर्जरी के मामले में वर्ष 2021 में 1300, 2022 में 1780, 2023 मेंं 3300 और अगस्त तक 3200 सर्जरी हो चुकी है। सबसे बड़ी बात तो यह है 2021 से शुरू कैंसर की प्राथमिक जांच के आंकड़ों में अब तक करीब 3200 मरीजों की जांच हुई है, जिसमें करीब 150 मरीज मिले हैं। इन मरीजों का हायर सेंटर पहुंचने पर तत्काल उपचार शुरू हो गया है।
वर्तमान समय में प्रतिदिन 2500 की ओपीडी हो रही है। इसमें गैर प्रांत व जनपद के करीब 300 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यहीं नहीं रेफलर का आंकड़ा घटा है। कैंसर के मरीजों की प्राथमिक जांच की सुविधा होने से समय से उनका हायर सेंटरों में उपचार शुरू हो गया है। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज गाजीपुर