कुपोषित बच्चियां
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नौनिहालों की अच्छी सेहत के लिए कागजों पर तो कई योजनाएं हैं, लेकिन कुपोषण का क्रूर पंजा बच्चों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। कुपोषण से उबरने की जंग लड़ने वाले बच्चे सुपोषण के लिए पुनर्वास केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसकी वजह जरूरतमंदों में जागरूकता की कमी तो है ही, उन्हें केंद्र तक ले जाने वाले सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों की लापरवाही भी बड़ी वजह है। कुपोषण की जंग में नौनिहालों के जीतने की बात तो दूर वह सेहत स्थिर भी नहीं रख पा रहे हैं। उनका वजन दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गाजीपुर में करीब 1240 बच्चे कुपोषित हैं। इनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए गाजीपुर जिला अस्पताल में 20 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र भी बना है। कोरोना काल में मार्च से दिसंबर तक यहां केवल 39 बच्चे ही पहुंच पाए। 23 दिसंबर को अमर उजाला की टीम जब पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंची तो सभी बेड खाली पड़े थे। पता चला कि 16 दिसंबर को एक बच्चा भर्ती हुआ था, लेकिन उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया।
परिजन नहीं जानते क्या होता पुनर्वास केंद्र
पोषण पुनर्वास केंद्र को बनाए जाने के पीछे यही उद्देश्य था कि यहां अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाए। साथ में रहने वाले परिजनों को भी भोजन मिलता है। लेकिन जानकारी के अभाव में ये सारी व्यवस्थाएं धरी रह जाती हैं। गाजीपुर के सैदपुर, सादात, कासिमाबाद ब्लॉक के गांवों में अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों से बात करने पर उन्होंने पुनर्वास केंद्र की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। बोले, इसके बारे में उन्हें किसी ने बताया ही नहीं। हर ब्लॉक के नाम पर बेड रिजर्व, बच्चों का पता नहीं गाजीपुर जिला अस्पताल में 20 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में ब्लॉकों से आने वाले बच्चों लिए बेड रिजर्व हैं। बेड के उपर ब्लॉक का नाम, इलाज करने वाले डॉक्टर और सीडीपीओ के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। फिर भी बच्चों का पुनर्वास केंद्र तक न पहुंच पाना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
कुपोषण की जंग लड़ रहे पंकज-रामसुंदर
गाजीपुर जिले के सैदपुर ब्लॉक के फरीदहां गांव में अतिकुपोषित बच्चे तीन साल के पंकज और साढ़े तीन साल के रामसुंदर की कहानी भी अजीब है। दोनों बच्चे कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं। पंकज की माता रानी के मुताबिक एक तो बच्चे की सेहत की चिंता दूसरे पति घर छोड़कर चले गए। दोनों संकट का सामना करना पहाड़ सा लगता है। बताया कि दीपावली के पहले तक चावल, गेहूं मिला था लेकिन नियमित नहीं मिलता हैं। किसी तरह परिवार का भरण पोषण हो रहा है। सही आहार न मिलने की वजह से तीनों बच्चों की सेहत की चिंता सता रही है। मौके पर मौजूद आंगनबाड़ी सहायिका ने बताया कि बच्चे का नाम अतिकुपोषित श्रेणी में हैं। इनका वजन भी किया जाता है। एक साल पहले इसका वजन महज 7.500 किलोग्राम था, अब एक किलोग्राम बढ़ा है। कुछ इसी तरह की हालात सुमित्रा के बेटे साढ़े तीन साल के रामसुंदर का है। मां ने बताया कि बेटा कमजोर पैदा ही हुआ था, तब से ही वैसा ही रह गया। यह पूछने पर कि क्यों नहीं पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने ले गए। माता ने बताया कि सैदपुर लेकर गए लेकिन वहां से वापस आ गए। हालत यह है कि रामसुंदर की सेहत में कोई खास सुधार नहीं दिखा रहा है।
अनमोल-अलबेला का कोई नहीं पूछता हाल सादात
ब्लॉक के बूढ़नपुर निवासी सीता देवी के दो बेटे साढ़े तीन साल के अनमोल और एक साल के बेटे अलबेला अतिकुपोषित हैं। सीता देवी ने बताया कि बच्चों की तबीयत में जब सुधार नहीं हुआ तो वाराणसी में निजी अस्पताल में इलाज कराया गया। अधिक पैसा न होने की वजह से बच्चों की सेहत जब सुधरी तो घर ले आए। करीब छह महीने से आज तक कोई बच्चों का वजन करने तक नहीं आया। यह पूछे जाने पर कि पोषण पुनर्वास केंद्र क्यों नहीं ले गई बच्चों को। सीता का कहना था कि दो अतिकुपोषित बच्चों को लेकर कैसे जाएंगे, वहां क्या होगा। बताया कि किसी तरह पति चंद्रदेव मजदूरी कर पेट पाल रहे हैं। सीता ने बताया कि बच्चों की सेहत कैसी है, कोई सुधि नहीं लेता है। इसी तरह की स्थिति बूढ़नपुर निवासी ज्ञानचंद की बेटी अंतिमा की है। एक साल दो महीने की बेटी का नाम अतिकुपोषित श्रेणी में दर्ज है। आंगनबाड़ी सहायिका की ओर से इन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भी जाने के लिए कहा गया लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। पूछने पर बताया कि पता नहीं वहां बच्चों का क्या होगा?
बच्चों की सेहत की लगातार देखभाल
कुपोषित, अतिकुपोषित बच्चों की सेहत की लगातार देखभाल की जा रही है। पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज, जांच आदि की पूरी सुविधाएं भी हैं। कुपोषित बच्चों को पुनर्वास केंद्र तक ले आने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी है। प्रयास होगा कि अधिक से अधिक बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक लाकर भर्ती किया जाए।
- डॉ. जीसी मौर्या, सीएमओ गाजीपुर
जिले में 1240 कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चे
जिले में ब्लॉकवार कुपोषित-अतिकुपोषित मिलाकर कुल 1240 बच्चे हैं। इनके सेहत की देखभाल की जा रही है। साथ ही संबंधित सीडीपीओ को समय-समय पर बच्चों का वजन कराते रहने, पुष्टाहार वितरण की मानीटरिंग करते रहने का निर्देश दिया जाता है। अभिभावकों की सहमति के बाद पोषण पुनर्वास केंद्र तक भी भिजवाया जाता है।
- दिलीप पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, गाजीपुर
एक नजर में आंकड़ा (नवंबर 2020 तक)
| कुपोषित बच्चे |
1055 |
| अतिकुपोषित बच्चे |
185 |
| इन बच्चों की सेहत में सुधार |
328 |
| आंगनबाड़ी कार्यकत्री |
1148 |
| आशा कार्यकर्ता |
478 |
| एएनएम |
25 |
अधिक कुपोषित बच्चों वाले पांच ब्लॉक
| कासिमाबाद |
173 |
| सैदपुर |
115 |
| जखनिया |
103 |
| सादात |
92 |
| जमानिया |
87 |