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प्राचीन शिवालयों का गढ़ है घाटमपुर क्षेत्र

Mon, 04 Mar 2019 01:03 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो
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फोटो- 03 जीटीआरपी 7- निबियाखेड़ा गांव का भद्रेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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- शिवालयों की निगरानी करेगा पुलिस का गश्ती दल
 - महाशिवरात्रि पर प्रमुख शिव मंदिरों में आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
घाटमपुर। घाटमपुर प्राचीन शिवालयों का गढ़ है। इनमें अज्योरी गांव का बिहारेश्वर महादेव मंदिर, यमुनापट्टी क्षेत्र के सिधौल गांव में स्थित मार्कण्डेयश्वर के अलावा निबियाखेड़ा गांव का भद्रेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख हैं। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर इन शिवालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके लिए प्रशासन ने मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था का खाका बनाया है। कोतवाल जनार्दन प्रताप सिंह राठौर ने बताया कि पुलिस की यूपी 100 और मोबाइल गाड़ियां लगातार क्षेत्र में गश्त करेंगी। बताया गया कि
मुगल रोड किनारे स्थित निबियाखेड़ा (भदवारा) गांव में चंदेल वंशीय राजाओं का बनवाया भद्रेश्वर महादेव मंदिर है। ईंटों से निर्मित इस मंदिर की कारीगरी और वास्तुकला दर्शनीय है। मंदिर पुरातत्व के संरक्षण में है। शिवरात्रि पर्व पर यहां दूर-दूर से शिवभक्त दर्शन-पूजन करने आते हैं।
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अज्योरी (सजेती) गांव के बिहारेश्वर महादेव मंदिर को दिल्ली सम्राट अकबर के प्रिय मंत्री बीरबल ने बनवाया था।। इतिहासकारों के मुताबिक दिल्ली में औरंगजेब की कैद में रखे गए मराठा सरदार छत्रपति शिवाजी जेल से फरार होने के बाद काफी दिनों तक इसी मंदिर में भेष बदलकर रुके थे। मंदिर कानपुर-सागर राजमार्ग के ठीक किनारे स्थित है। सिधौल गांव में स्थित मार्कण्डेयश्वर महादेव का मंदिर भी काफी प्राचीन है। पतारा के बैजनाथ धाम मंदिर का वर्णन परिमाल रासो (आल्हाखंड) में मिलता है।  पतरसा गांव के पातालेश्वर महादेव और नंदना गांव के रामेश्वर महादेव मंदिर में मेला और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
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रिंद नदी के किनारे बसे बरनांव गांव का बाणेश्वर महादेव मंदिर, सिमौर गांव के कालेश्वर और चौबेपुर (नवेड़ी) गांव के भोलेश्वर महादेव मंदिर भी प्राचीन और दर्शनीय हैं। नई तहसील नर्वल का सृजन होने के बाद कई प्राचीन शिवालय घाटमपुर तहसील के राजस्व नक्शे से बाहर हो गए हैं। इनमें पुरातत्व विभाग से संरक्षित रिंद नदी के किनारे बसे करचुलीपुर गांव का औलियाश्वर महादेव मंदिर के अलावा परौली, कोरथा, गोपालपुर और पालपुर गांव के प्राचीन शिवालय शामिल हैं।

 
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