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परीक्षा होती जाएगी, लैपटाप बंटते जाएंगे

Sat, 30 Mar 2013 01:33 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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शासन ने 20 जिलों में लैपटाप वितरण का कार्यक्रम तैयार कर लिया है।
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मुख्यमंत्री से मंजूरी मिलते ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिया जाएगा।

योजना है कि विश्वविद्यालयीय परीक्षाएं खत्म होने के बाद लैपटाप वितरण में तेजी लाई जाए।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने करीब 20 जिलों में लैपटाप वितरण का कार्यक्रम तैयार किया है। इनमें मैनपुरी, कन्नौज, इलाहाबाद, झांसी, सहारनपुर, गाजीपुर, बलिया, कानपुर जैसे जिले शामिल हैं।

जिन जिलों के कालेजों में विश्वविद्यालयीय परीक्षाएं खत्म होती जाएंगी, वहां लैपटाप का वितरण कर दिया जाएगा।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि लखनऊ में लैपटाप वितरण के बाद पांच जिलों में लैपटाप वतरण का कार्यक्रम था। मगर विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं की वजह से वितरण नहीं हो सका।
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उलझी टैबलेट खरीद प्रक्रिया
दूसरी ओर प्रदेश सरकार की टैबलेट खरीद प्रक्रिया कठिन शर्तों में उलझ कर रह गई है। खुले बाजार में आपस में तगड़ी प्रतिस्पर्धा कर रही कंपनियां इस बहुप्रचारित योजना में आगे नहीं आईं।

इस बीच टैबलेट आपूर्ति के लिए पहली दफा जारी टेंडर में केवल एक कंपनी के शामिल होने की वजह से इस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया।

अब इसके लिए दुबारा टेंडर होगा जिसके लिए आदेश जारी कर दिया गया है। इधर संकेत है कि यदि नए सिरे से आमंत्रित टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों की ओर से शर्तों में शिथिलता को लेकर आग्रह आता है तो सरकार उस पर विचार कर सकती है।

प्रदेश में 2012 की यूपी बोर्ड परीक्षा में दसवीं पास विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार ने टैबलेट देने की घोषणा की है। टैबलेट की खूबियां (विशिष्टयां) व इसके लिए शर्तें तय करने के बाद टेंडर आमंत्रित हुए तो प्रक्रिया में शामिल तीन कंपनियों (एचसीएल, एचपी और एसर) में सिर्फ एचसीएल ने ही अपना नमूना जमा किया।

टेंडर में एक ही कंपनी (एचसीएल) के शामिल होने की वजह से मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। शुक्रवार को दुबारा टेंडर आमंत्रित करने के आदेश जारी कर दिए गए।

टैबलेट खरीद प्रक्रिया में कंपनियों की बेरुखी को लेकर जानकार बताते हैं कि इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को जो लैपटाप दिया गया उसमें कमोवेश वैसी ही खूबियां हैं जैसा कि बाजार में उपलब्ध लैपटाप मे हैं।

ऐसे में कंपनियों को उसमें ज्यादा मुश्किल नहीं आई। मगर सरकार ने टैबलेट की जो खूबियां व मानक तय किया वह बाजार में उपलब्ध टैबलेट से काफी हटकर हैं। ऐसे में कंपनियों को इन टैबलेट के लिए कई तरह के अतिरिक्त कार्य करने होंगे। यह वह प्रमुख वजह है जिसकी वजह से वे रुचि नहीं दिखा रहीं।

सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा ने बताया कि दूसरी बार आमंत्रित टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों की ओर से यदि टैबलेट के मानक व शर्तों को लेकर किसी तरह के संशोधन का सुझाव आता है तो उस पर विचार किया जाएगा। हालांकि नए टेंडर की शर्तें पहले टेंडर वाली ही हैं।

अहम कारण कीमत भी
एक सरकारी टैबलेट की अनुमानित कीमत 3500 रुपये आंकी गई है। वर्तमान में बाजार में इस मानक के टैबलेट करीब 22 हजार रुपये में उपलब्ध है।

वह भी केवल एक कंपनी एप्पल बना रही है। बताते हैं कि सरकारी टैबलेट का कीमत इतना कम रखने की वजह से मार्केट में मौजूद एक दर्जन कंपनियों ने रुचि ही नहीं दिखाई।
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एचपी, एचसीएल, एसर ने रुचि दिखाई जो खुद टैबलेट बनाती ही नहीं हैं। जबकि वे कंपनियां आई ही नहीं जो खुद निर्माण करती हैं।

बैट्री बैकअप भी पेंच
सरकार विद्यार्थियों को दिए जाने वाले टैबलेट का बैट्री बैकअप चार से पांच घंटे चाहती है जबकि बाजार में उपलब्ध टैबलेट दो से तीन घंटे का ही बैटरी बैकअप देते हैं।

सबसे ज्यादा बैट्री बैकअप एप्पल का बताया जाता है। कई अन्य कपिनयों के टैबलेट का बैट्री बैकअप करीब दो घंटे ही है।
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