छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी सहित प्रदेश के अन्य राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध तीस निजी डिग्री कॉलेजों की याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ हाईकोर्ट ने बीएड की फीस 73,000 रुपये तय कर दी है।
यह फीस शैक्षिक सत्र 2013-14 से वसूली जाएगी। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि शासन से निर्धारित 51,250 रुपये फीस ही बीएड कॉलेज संचालक अपने पास रख सकेंगे।
बढ़ी फीस (21750 रुपये) का डिमांड ड्राफ्ट संबंधित यूनिवर्सिटी में रखना होगा। लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश छह मार्च 2013 को आया है। इसका लाभ वही कॉलेज उठा सकेंगे, जिनकी याचिका पर फैसला किया गया है।
बीएड के ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट 2013-14 के आयोजन की जिम्मेदारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी को सौंपी गई है। यह टेस्ट 24 अप्रैल को प्रस्तावित है। इससे पहले ही करीब तीस बीएड कॉलेज संचालक फीस बढ़ोतरी के मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गए।
कॉलेजों ने तर्क दिया कि शासन से निर्धारित 51,250 रुपये फीस कम है। इससे कॉलेज का खर्चा पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में फीस बढ़ाई जानी चाहिए। इस मामले की सुनवाई जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अदालत में हुई।
सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिका दाखिल करने वाले कॉलेज 66,000 रुपये ट्यूशन फीस, 4,000 रुपये कैंपस शुल्क, 2,000 रुपये स्टूडेंट वेलफेयर फीस और 1,000 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ले सकते हैं।
हालांकि संबंधित कॉलेज अपने पास शासन से निर्धारित फीस ही रखेंगे। हाईकोर्ट ने इस पर शासन को भी दिशा-निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि डिग्री कॉलेजों के खर्च का आकलन करके फीस नए सिरे से तय की जाए। जितना खर्च आए, उतनी फीस निर्धारित की जाए। यदि फीस कम बैठती है तो अतिरिक्त फीस (यूनिवर्सिटी में के पास मौजूद बढ़ी फीस) संबंधित स्टूडेंट को वापस कराई जाए।