‘नसबंदी कराई तो भारी काम नहीं कर पाऊंगा’। पुरुष नसबंदी पर ऐसी भ्रांतियां दूर करने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह फेल रहा है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में केवल 0.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी हो रही है। इसकी वजह से अब राजधानी में आबादी 46 लाख के करीब पहुंच चुकी है।
क्या कहती है रिपोर्ट
विशेषज्ञों की मानें तो यही हालात रहे तो 2030 तक लखनऊ में रहने की जगह नहीं बचेगी। जिला स्तरीय स्वास्थ्य सर्वे (डीएलएचएस-3) के आंकड़ों में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है।
डीएलएचएस-3 की रिपोर्ट बताती है कि लखनऊ में अब भी 99.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी का तरीका नहीं अपना रहे।
नहीं कर रहे कंडोम का भी इस्तेमाल
परिवार नियोजन का अस्थाई उपाय कंडोम की पहुंच भी केवल 11.3 प्रतिशत लोगों तक ही है। 35 प्रतिशत से ज्यादा माता-पिता के तीन से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं।
वहीं, 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनके तीन बच्चे हैं। ऐसे में 55 प्रतिशत परिवार में तीन या उससे ज्यादा बच्चे जनसंख्या बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
लोगों में है जागरुकता की कमी
परिवार नियोजन पर काम कर रही संस्था यूएचआई की राज्य निदेशक डॉ. मीनाक्षी जैन ने बताया कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि नसबंदी के बाद वे भारी काम नहीं कर पाएंगे।
महिलाएं भी कुछ ऐसी ही सोच रखती हैं। और उनमें भी नसबंदी का आंकड़ा केवल 18.9 प्रतिशत है।
धार्मिक वजहें भी हैं
उनके मुताबिक धार्मिक वजहें भी परिवार नियोजन के उपायों को अपनाने में आड़े आती हैं। 19.2 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें न चाहते हुए भी गर्भवती होना पड़ रहा है।